आज सुबह आजादी के 77 वा वर्षगाठ पर जब मैं सुबह-सुबह जोर-जोर से देश भक्ति गीत…. ‘अपनी आजादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं…. सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं,.. गा रहा था तो माँ ने मेरे दोनों कान एठते हुए कहा, क्यों सुबह-सुबह गधे की तरह चीख रहा है पापा बुखार से कराह रहे है वो तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा.
आजादी क़े इस ख़ुशी क़े मौके पर स्कूल की हिंदी कॉपी का पन्ना फाड़कर ज़ब मैं तिरंगा झंडा बना रहा था तो क्लास टीचर ने मुझे छड़ी से पीटते हुए कहा की बेवकूफ- स्कूल की इतनी महंगी कापी फाड़ कर तू झंडा बना रहा,देशभक्ति दिखा रहा है.100 बार उठक़ -बैठक़ करो और मेरे कान एठते हुए क्लास से बाहर कर दिया.
मैं सोच रहा था कि ये कैसी आजादी है जो मेरे जज़्बात, मेरी ख़ुशी और मेरी आजादी को कुचल रहा.