रांची: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहयोग से बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में चल रही रेपसीड-मस्टर्ड और रबी दलहन से संबंधित अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजनाओं के तहत शनिवार को अग्रिम पंक्ति प्रत्यक्षण हेतु बीज वितरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
आनुवंशिकी एवं पौधा प्रजनन (जीपीबी) विभाग के डॉ आरबी प्रसाद मेमोरियल हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में बीएयू के अनुसंधान निदेशक डॉ पीके सिंह ने रांची, गुमला और खूंटी जिलों के लगभग 300 किसानों के बीच सरसों (बिरसा भाभा मस्टर्ड-1 प्रभेद) और मसूर (एल 4717 प्रभेद) के दो-दो क्विंटल बीज का वितरण किया। इन उन्नत प्रभेदों की उत्पादकता पुरानी परंपरागत किस्मों से काफी अधिक है। साथ ही उन्हें खाद, उर्वरक एवं रासायनिक कीटनाशक भी निशुल्क दिया गया। इससे किसान 100 एकड़ में सरसों तथा 50 एकड़ में मसूर की फसल लगा सकेंगे।
इस अवसर पर परियोजना प्रभारी डॉ अरुण कुमार, डॉ चंद्रशेखर महतो तथा जीपीबी विभाग के अध्यक्ष डॉ नीरज कुमार भी उपस्थित थे।
वैज्ञानिकों ने प्रशिक्षणार्थी किसानों को सरसों और मसूर फसल की वैज्ञानिक खेती करने, कृषि की लागत घटाने तथा अधिक पैदावार लेने की तकनीकी जानकारी दी। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक यथासमय किसानों के खेत में जाकर उनकी खड़ी फसल का निरीक्षण करेंगे और आवश्यक मार्गदर्शन भी प्रदान करेंगे।