देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के सर्वोत्तम हित निर्धारण पर तीन दिवसीय राज्य-स्तरीय क्षमता-वर्धन कार्यक्रम संपन्न
राँची:देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों (CNCP) के सर्वोत्तम हित निर्धारण (Best Interest Determination—BID) पर तीन दिवसीय राज्य-स्तरीय क्षमता-वर्धन कार्यक्रम 28 अक्टूबर 2026 को होटल रेनड्यू, राँची में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम का आयोजन झारखंड सरकार के महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के अंतर्गत झारखंड राज्य बाल संरक्षण सोसाइटी (JSCPS) एवं UNICEF झारखंड के संयुक्त तत्वाधान में एवं सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स (CCR), NUSRL, रांची के सहयोग से किया गया ।
सर्वोत्तम हित निर्धारण (Best Interest Determination—BID) प्रशिक्षण कार्यक्रम में अबतक दो बैच में 70 बाल कल्याण समिति (CWCs) के अध्यक्ष एवं सदस्यों का बालकों के सर्वोत्तम हित निर्धारण के चरणों पर क्षमता वर्धन किया गया ।
कार्यक्रम का उद्देश्य किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015, यथा संशोधित, तथा बाल संरक्षण से संबंधित अन्य कानूनों और रूपरेखाओं के अंतर्गत अपने वैधानिक दायित्वों का निर्वहन करते समय सर्वोत्तम हित निर्धारण के सिद्धांत को लागू करने हेतु CWC सदस्यों के ज्ञान और व्यावहारिक क्षमता को मजबूत करना था।
प्रशिक्षण सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड राज्य बाल संरक्षण सोसाइटी (JSCPS) के निदेशक श्री विजय कुमार सिन्हा ने बच्चों के बेहतर पुनर्वास एवं नियमित फॉलोअप के लिए बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई एवं अन्य हितधारकों के साथ समन्वय को और मजबूत करने पर जोर दिया । उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि दत्तक ग्रहण के बाद बच्चों से संबंधित अभिलेखों एवं सूचनाओं का उचित अनुवर्तन किया जाए और संबंधित बाल कल्याण समिति (CWC) बच्चों की स्थिति की नियमित जानकारी लेते हुए आवश्यक अनुवर्ती कार्रवाई सुनिश्चित करे। साथ ही उन्होंने ने स्पष्ट निर्देश दिया कि प्रायोजन (Sponsorship) कार्यक्रम के अंतर्गत आच्छादित प्रत्येक बच्चे की विवरणी सहित विस्तृत प्रगति प्रतिवेदन विभाग को मासिक आधार पर समर्पित करने का निर्देश दिए।
नैशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एण्ड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), राँची के माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल ने अपने संबोधन में साक्ष्य-आधारित व्यवहार को मजबूत करने, संस्थागत प्रतिक्रियाओं में सुधार करने और नीति-विकास में योगदान देने के लिए शैक्षणिक संस्थानों तथा सरकारी बाल संरक्षण निकायों के बीच सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी कहा कि CWC सदस्यों को बच्चों और किशोरों से जुड़े मामलों पर उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियों को समझते हुए सहानुभूति और संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में तकनीकी विशेषज्ञों के सत्र, संवादात्मक चर्चा, मामलों पर आधारित अध्ययन और व्यावहारिक अभ्यास शामिल थे। संदर्भ व्यक्ति के रूप में सुश्री भारती अली, सुश्री अर्लीन मनोहरन तथा सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स (CCR), NUSRL, रांची की प्रो. (डॉ.) के. श्यामला ने अपना योगदान दिया । सत्रों में बाल अधिकारों के सिद्धांतों, सर्वोत्तम हित निर्धारण के सात प्रमुख तत्वों, CWC की वैधानिक जिम्मेदारियों तथा निष्पक्ष, तर्कसंगत और प्रत्येक बच्चे की परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने के महत्व पर चर्चा हुई। चर्चा में संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अभिसमय (UNCRC), किशोर न्याय अधिनियम, 2015, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012 तथा बाल संरक्षण से संबंधित अन्य रूपरेखाओं का संदर्भ लिया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतिम सत्र में UNICEF झारखंड की बाल संरक्षण विशेषज्ञ, सुश्री प्रीति श्रीवास्तव ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) के अनुसार, बाल कल्याण समिति (CWC) को बच्चों के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान साझा की गई बच्चों के सर्वोत्तम हित निर्धारण की चेकलिस्ट, CWC को बच्चों से संबंधित मामलों में उचित निर्णय लेने में सहायक होगी।
कार्यक्रम को सफल बनाने में यूनिसेफ़ के गौरव, सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स, NUSRL, रांची के नरेंद्र शर्मा, डॉ तबरेज़ आलम एवं दीपक कुमार अहम भूमिका निभाई ।
