NEWS7AIR

वन सब्जी बाजार का सफल समापन: प्रकृति संरक्षण, जनजातीय स्वावलंबन और ग्राम विकास का दिया संदेश

“वन से जन-जन तक” की पहल को जनांदोलन बनाने का आह्वान

रांची:वनवासी कल्याण केन्द्र, झारखण्ड की ओर से आरोग्य भवन, बरियातू, रांची में आयोजित दो दिवसीय ‘वन सब्जी बाजार’ का शुक्रवार को समापन हुआ। इस अवसर पर जनजातीय समाज की पारंपरिक वन संपदा, पौष्टिक वन सब्जियों, औषधीय जड़ी-बूटियों एवं स्थानीय उत्पादों को व्यापक समाज तक पहुंचाने तथा जनजातीय परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाने के संकल्प को दोहराया गया। कार्यक्रम ने प्रकृति संरक्षण, स्वास्थ्य, जनजातीय संस्कृति और ग्राम स्वावलंबन को एक सूत्र में जोड़ने का संदेश दिया।

समापन सत्र में मुख्य अतिथि श्री संजय सेठ जी, सांसद (रांची लोकसभा क्षेत्र) एवं रक्षा राज्य मंत्री, विशिष्ट अतिथि श्री अजीत कुमार जी, वरिष्ठ अधिवक्ता, झारखण्ड उच्च न्यायालय, तथा मुख्य वक्ता श्री प्रफुल्ल अकांत जी, क्षेत्रीय संगठन मंत्री, उत्तर मध्य क्षेत्र, वनवासी कल्याण केन्द्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम की प्रस्तावना वनवासी कल्याण केन्द्र, झारखण्ड के प्रांत महामंत्री श्री धनंजय सिंह जी ने रखी। उन्होंने वन सब्जी बाजार की परिकल्पना, उद्देश्य और जनजातीय समाज की आजीविका को सशक्त बनाने में इसकी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों से समाज और प्रकृति के बीच आत्मीय संबंध को और मजबूत किया जा सकता है।

अखिल भारतीय ग्राम विकास प्रमुख श्री विंदेश्वर साहू जी ने अपने संबोधन में पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति का संरक्षण केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य और ग्रामीण जीवन की समृद्धि से भी जुड़ा हुआ है। स्थानीय वन संपदा के प्रति जागरूकता बढ़ाकर प्रकृति के अनुकूल जीवनशैली को प्रोत्साहित करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

विशिष्ट अतिथि श्री अजीत कुमार जी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ‘वन सब्जी बाजार’ जैसे आयोजन निरंतर होने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि इस प्रकार के कार्यक्रम प्रत्येक माह आयोजित किए जाएं, ताकि वन उत्पादों के प्रति लोगों की रुचि बढ़े, जनजातीय परिवारों को नियमित बाजार मिले और स्थानीय उत्पादों को व्यापक पहचान प्राप्त हो।

मुख्य वक्ता श्री प्रफुल्ल अकांत जी ने जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास, उसकी सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्र निर्माण में योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज केवल लेने वाला नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध परंपराओं, ज्ञान, प्रकृति संरक्षण की जीवनशैली और सांस्कृतिक मूल्यों के माध्यम से समाज को बहुत कुछ देने वाला समाज है। सरहुल और करम जैसे पर्व केवल नृत्य और उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति श्रद्धा, सामुदायिक एकता और जीवन-दर्शन की अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने कहा कि भारत का उत्थान जनजातीय समाज और ग्रामीण समाज के उत्थान से अभिन्न रूप से जुड़ा है। औपनिवेशिक शासन के दौरान जनजातीय समाज को दबाने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की चेतना और शक्ति को समझे बिना भारत की वास्तविक प्रगति को नहीं समझा जा सकता। उन्होंने समाज के सभी वर्गों को एकात्मता के भाव से जोड़ने और जनजातीय समाज के स्वाभिमान को मजबूत करने का आह्वान किया।

मुख्य अतिथि श्री संजय सेठ जी ने कहा कि ‘वन सब्जी बाजार’ को केवल एक समारोह के रूप में नहीं, बल्कि दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक माह के अंतिम शनिवार और रविवार को आरोग्य भवन में वन सब्जी बाजार लगे। उन्होंने कहा कि आरोग्य भवन से शुरू हुई यह पहल झारखण्ड के कोने-कोने तक पहुंचे और अधिकाधिक लोग स्थानीय एवं प्राकृतिक उत्पादों को अपनाएं। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली प्रवास के दौरान भी उन्हें जैविक सब्जियों का स्वाद याद आता है। उन्होंने स्थानीय उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने और जनजातीय परिवारों की मेहनत को उचित सम्मान देने पर जोर दिया।

दो दिवसीय बाजार में दुर्लभ एवं पौष्टिक वन सब्जियों, औषधीय जड़ी-बूटियों, विविध वन उत्पादों तथा स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री की गई। इसके माध्यम से नागरिकों को वन संपदा की उपयोगिता, पारंपरिक ज्ञान और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों के महत्व को जानने का अवसर मिला। साथ ही, जनजातीय परिवारों और महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बाजार से जोड़ने की दिशा में सार्थक पहल की गई।

वनवासी कल्याण केन्द्र, झारखण्ड का यह आयोजन ‘तू-मैं एक रक्त’ की भावना को साकार करते हुए जनजातीय समाज और शेष समाज के बीच आत्मीयता, सहभागिता एवं एकात्मता को मजबूत करने का प्रयास है। आयोजकों ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे स्थानीय वन उत्पादों को अपनाएं, प्रकृति संरक्षण में सहभागी बनें तथा जनजातीय समाज के स्वावलंबन को प्रोत्साहित करें।

वन सब्जी बाजार का संदेश:

“स्वास्थ्य का आधार, जनजातीय आजीविका का सम्मान।”

“प्रकृति का संरक्षण, जनजातीय स्वावलंबन और समृद्ध गांव-विकसित भारत की ओर एक सार्थक कदम।”

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.