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झारखंड के ग्रामीण क्षेत्र महाजन साहूकार और निजी समूह ऋण के जाल में, कोरे चेक और दस प्रतिशत ब्याज से उजड़ते परिवार, सरकार दे ब्याज मुक्त बैंक ऋण

लेखक: राजेश कुमार , गिरिडीह

Ranchi: झारखंड के गाँव आज कर्ज के भयंकर जाल में फँसे हुए हैं। पूरे राज्य में दो प्रकार के कर्ज देने वाले सक्रिय हैं। पहला गाँव का परंपरागत महाजन साहूकार और दूसरा शहर की निजी माइक्रो फाइनेंस कंपनी। दोनों मिलकर ग्रामीण महिला, युवा, किसान और मजदूर का शोषण कर रहे हैं। गिरिडीह, बगोदर, बिरनी, मरकच्चो, डुमरी, हजारीबाग, दुमका, गुमला से लेकर पलामू तक यही स्थिति है।

महिलाओं को समूह ऋण के नाम पर तीस हजार से पचास हजार रुपये दिए जाते हैं। बदले में उनसे कोरा चेक, कोरा स्टाम्प पेपर, आधार कार्ड, पैन कार्ड की छायाप्रति और घर की जमीन के कागजात की फोटो ले ली जाती है। प्रत्येक सप्ताह किस्त वसूली होती है। एक किस्त चूकने पर चार पाँच लड़के मोटरसाइकिल पर घर पहुँचते हैं। घर के सामने जोर जोर से चिल्लाते हैं। पूरे गाँव के सामने गाली गलौज करते हैं। महिलाओं को धमकाया जाता है कि चेक बाउंस कराकर जेल भिजवा देंगे। लज्जा के भय से महिला दूसरा कर्ज लेकर पहला चुकाती है। इस प्रकार कर्ज का जाल बढ़ता जाता है।

युवा किसान और मजदूर जब बैंक जाते हैं तो बैंक सिबिल स्कोर और गारंटर माँगता है। गरीब के पास न गारंटर होता है न सिबिल। तब वह विवश होकर महाजन के पास जाता है। महाजन पाँच प्रतिशत से दस प्रतिशत मासिक ब्याज पर पैसा देता है। अर्थात एक लाख रुपये पर दस हजार रुपया महीना केवल ब्याज। वर्ष में एक लाख बीस हजार केवल ब्याज। मूलधन वैसा ही खड़ा रहता है। ब्याज न देने पर खेत लिखवा लिया जाता है। ट्रैक्टर मोटरसाइकिल छीन ली जाती है। घर का बर्तन तक उठा लिया जाता है। कई परिवारों ने इसी कारण पलायन कर दिया है।

इसका परिणाम अत्यंत दुखद है। पहला परिणाम आत्महत्या। किसान कर्ज के बोझ से आत्महत्या कर रहे हैं। दूसरा परिणाम विवाह टूटना। पति पत्नी में कर्ज को लेकर प्रतिदिन लड़ाई होती है। तीसरा परिणाम घर उजड़ना। जमीन बिक रही है। बच्चे विद्यालय छोड़ रहे हैं। युवा नशे की ओर जा रहे हैं। पूरा परिवार बिखर रहा है।

इससे बचने के लिए राज्य सरकार और केन्द्र सरकार को ठोस पहल करनी होगी। हमारी पाँच माँगें हैं।

पहली माँग ब्याज मुक्त सरकारी ऋण। प्रत्येक महिला और किसान को एक लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण सीधे बैंक से मिलना चाहिए। बिना समूह के बिना साहूकार के। केवल आधार कार्ड पर ऋण मिले।

दूसरी माँग साहूकारी कानून कठोर हो। पाँच प्रतिशत से अधिक ब्याज लेने वाले पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज हो। उसका अनुज्ञप्ति पत्र रद्द किया जाए। कोरा चेक लेना कानूनन अपराध घोषित हो।

तीसरी माँग प्रत्येक पंचायत में ऋण शिविर लगे। महीने में एक बार भारतीय स्टेट बैंक और बैंक ऑफ इंडिया का शिविर हर पंचायत में लगे। जहाँ बीस हजार से पचास हजार तक का ऋण तुरंत मिले।

चौथी माँग कर्ज मुक्ति सहायता केंद्र बने। एक दूरभाष संख्या जारी हो जहाँ ग्रामीण बिना भय के साहूकार की शिकायत कर सकें। शिकायत पर चौबीस घंटे में कार्रवाई हो।

पाँचवी माँग निजी कंपनी पर रोक लगे। जो कंपनी गाँव में धमकाती है गाली देती है उसका पंजीकरण झारखंड में बंद किया जाए।

झारखंड आदिवासी मूलवासी का राज्य है। यहाँ के लोग सीधे सरल और मेहनती हैं। सरकार मुफ्त अनाज दे रही है अच्छी बात है लेकिन कर्ज से मुक्ति सबसे बड़ी सहायता होगी। कर्ज मुक्त गाँव ही समृद्ध झारखंड बनाएगा। यदि सरकार अभी नहीं जागी तो अगले पाँच वर्षों में हर दूसरा घर कर्ज में बिक जाएगा। इसलिए सरकार को तुरंत कदम उठाना चाहिए।

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