चयनित अभ्यर्थियों की सरकार से गुहार: ‘दोषियों को मिले कड़ी सजा, लेकिन चंद लोगों के पाप का हर्जाना निर्दोषों से न वसूला जाए’
रांची: झारखंड में हाल ही में संपन्न हुई सरकारी परीक्षा के सफल अभ्यर्थियों ने अपने खिलाफ सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे भ्रामक नैरेटिव और मानसिक उत्पीड़न पर गहरा दुख व्यक्त किया है। चयनित युवाओं ने एकजुट होकर सरकार से मांग की है कि पूरी परीक्षा को रद्द करने (Blanket Cancellation) के बजाय केवल दोषियों को चुन-चुन कर बाहर निकाला जाए।
अधिकारियों और सरकार के सामने अपनी बात रखते हुए चयनित अभ्यर्थियों ने पाँच मुख्य बिंदुओं के जरिए अपना पक्ष रखा है:
1. 35-40 लाख के आरोपों को बताया बेबुनियाद
सफल अभ्यर्थियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना किसी वित्तीय जांच (Financial Audit) या फोरेंसिक साक्ष्य के यह अफवाह फैलाई जा रही है कि हर अभ्यर्थी 35-40 लाख रुपये की सेटिंग करके आया है। अभ्यर्थियों ने कहा कि यह लांछन सालों की कठिन तपस्या को कलंकित करता है। इस परीक्षा में 650 से अधिक आदिवासी (ST) और दिव्यांग (PH) भाई-बहन भी चयनित हुए हैं, जिन्होंने घोर अभावों में रहकर अपनी योग्यता साबित की है। ऐसे में बिना जांच के पूरी परीक्षा रद्द करना इस शोषित वर्ग को दोबारा आर्थिक अंधकार में धकेल देगा।
2. सुरक्षित करियर और पुरानी नौकरियों का त्याग
चयनित युवाओं में लगभग 600 ऐसे हैं जो पहले से देश के अन्य हिस्सों में सरकारी या निजी क्षेत्रों में अच्छी नौकरियों पर थे। अपने गृह राज्य की सेवा करने के सपने के साथ वे अपनी पुरानी सीनियरिटी और वित्तीय सुरक्षा दांव पर लगाकर यहाँ आए थे। वर्तमान अनिश्चितता के कारण ये युवा आज बीच चौराहे पर खड़े हैं।
3. निष्पक्ष जांच का पूर्ण समर्थन
चयनित अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी स्तर की जांच के खिलाफ नहीं हैं। वे राज्य सरकार और विधिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा करते हैं। उनका कहना है कि सरकार जिस भी स्वतंत्र एजेंसी (CID/SIT) से जांच करवाना चाहे, वे उसका स्वागत करते हैं। अभ्यर्थियों ने माननीय हाई कोर्ट के उस ‘कंडीशनल क्लॉज’ का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि भविष्य में जांच के दौरान यदि कोई दोषी पाया जाता है, तो सिर्फ उस विशेष छात्र की उम्मीदवारी रद्द हो, न कि पूरी परीक्षा की।
4. सोशल मीडिया पर साइबर बुलिंग और महिलाओं का उत्पीड़न
सफल अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि असफल और कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा सोशल मीडिया (X, फेसबुक, व्हाट्सएप) पर उनकी तस्वीरें, रोल नंबर और क्रेडेंशियल्स सार्वजनिक कर साइबर बुलिंग की जा रही है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि नवनियुक्त महिला अभ्यर्थियों को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाकर उनके चरित्र पर अभद्र टिप्पणियां की जा रही हैं, जो कि किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है।
5. सरकार से अंतिम विधिक गुहार
अभ्यर्थियों ने माननीय मुख्यमंत्री से हाथ जोड़कर प्रार्थना की है कि दोषियों को ढूंढ-ढूंढ कर कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाए, लेकिन बेगुनाहों का हक न छीना जाए। नियुक्ति पत्र में पहले से जुड़े ‘सशर्त सुरक्षा क्लॉज’ का उपयोग करते हुए केवल संदिग्धों की सेवा निरस्त की जाए, ताकि ईमानदार और मेधावी छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।