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दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि: झारखंड भर में दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, सीएम हेमंत ने किया 14 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण

रांची/रामगढ़:झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक, पृथक झारखंड राज्य आंदोलन के महानायक और तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि 4 अगस्त 2026 को पूरे राज्य में अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई. 4 अगस्त 2025 को 81 वर्ष की आयु में दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में उनका निधन हुआ था. आज उनकी पहली बरसी पर झारखंड का कोना-कोना उनके ऐतिहासिक संघर्षों और आदिवासियों के हक की लड़ाई को याद कर भावुक हो उठा.

नेमरा में मुख्य आयोजन और भव्य प्रतिमा का अनावरण

पुण्यतिथि का मुख्य और सबसे भव्य कार्यक्रम शिबू सोरेन के पैतृक गांव रामगढ़ के नेमरा (लुकैयाटांड़ शहीद स्मारक परिसर) में आयोजित किया गया. इस विशेष अवसर पर उनके सुपुत्र और झारखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दिशोम गुरु की 14 फीट ऊंची आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया. प्रतिमा के अनावरण के दौरान उपस्थित हजारों लोगों ने ‘दिशोम गुरु अमर रहें’ के नारे लगाए. सीएम हेमंत सोरेन ने इस मौके पर कहा कि गुरु जी का जीवन साधारण था, लेकिन उनके विचार और आदर्श हमेशा राज्य का मार्गदर्शन करते रहेंगे. मुख्यमंत्री ने जनता से अपील की कि वे गुरु जी के दिखाए रास्ते पर चलकर झारखंड को समृद्ध बनाने का संकल्प लें.

राज्यव्यापी विकास मेला और सामाजिक सरोकार

इस ऐतिहासिक दिन को केवल एक शोक सभा तक सीमित न रखकर राज्य सरकार ने इसे जन-कल्याण से जोड़ा. नेमरा में एक विशाल विकास मेले का आयोजन किया गया, जहां करोड़ों रुपये की सरकारी परिसंपत्तियों का वितरण गरीब और जरूरतमंद आदिवासियों के बीच किया गया. इसके अलावा, धनबाद, रांची और दुमका सहित राज्य के सभी 24 जिलों में झामुमो कार्यकर्ताओं और जिला प्रशासनों द्वारा स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित किए गए. अस्पतालों में मरीजों के बीच फल बांटे गए और गरीब बस्तियों में वस्त्र व भोजन का वितरण कर शिबू सोरेन की सेवा भावना को जीवंत रखा गया.

आदिवासी अस्मिता के प्रतीक: एक महान विरासत

शिबू सोरेन महज एक राजनेता नहीं, बल्कि शोषितों और वंचितों की आवाज थे. उन्होंने 15 वर्ष की कम उम्र में अपने पिता की साहूकारों द्वारा हत्या के बाद महाजनी प्रथा और सूदखोरी के खिलाफ आदिवासियों को एकजुट करना शुरू किया था. उनके इसी अटूट समर्पण के कारण उन्हें ‘दिशोम गुरु’ (देश के गुरु) की उपाधि मिली. उन्होंने सात बार लोकसभा सांसद और केंद्रीय कोयला मंत्री के रूप में भी देश की सेवा की. उनके इस अप्रतिम योगदान के लिए साल 2026 में उन्हें मरणोपरांत भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. उनकी पहली पुण्यतिथि पर पूरा झारखंड उनके चरणों में नमन कर रहा है.

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