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झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने हूल दिवस पर सिद्धो-कान्हू को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

देशभर में याद किए गए संताल क्रांति के अमर शहीद

Ranchi: झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने रांची स्थित लोक भवन में ‘हूल दिवस’ के गरिमामयी अवसर पर संताल विद्रोह के महानायकों सिद्धो और कान्हू के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस विशेष समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि 1855 की हूल क्रांति भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक स्वर्णिम और अविस्मरणीय अध्याय है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सिद्धो, कान्हू, चांद, भैरव, फूलो और झानो सहित हूल आंदोलन के सभी वीर योद्धाओं ने ब्रिटिश हुकूमत के अन्याय, क्रूर शोषण और औपनिवेशिक शासन के खिलाफ अदम्य साहस का परिचय दिया था, जिनका सर्वोच्च बलिदान और अटूट राष्ट्रप्रेम देशवासियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।

इस ऐतिहासिक अवसर पर देश के शीर्ष नेतृत्व ने भी 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की नींव रखने वाली इस महान संताल क्रांति के शहीदों को नमन किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संदेश में जल, जंगल, जमीन और जनजातीय अस्मिता की रक्षा के लिए आदिवासियों के इस ऐतिहासिक संघर्ष को राष्ट्र की अमूल्य धरोहर बताया। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हूल दिवस को जनजातीय समुदाय के अप्रतिम साहस और संकल्प का एक अनूठा प्रतीक घोषित करते हुए कहा कि अन्याय के आगे न झुकने की उनकी यह गौरवशाली गाथा हर भारतीय को स्वाभिमान से भर देती है, जबकि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शहीदों को नमन करते हुए हूल को राज्य की अस्मिता की असली पहचान बताया।

राजधानी रांची के मुख्य समारोह के समानांतर, सिद्धो-कान्हू की ऐतिहासिक जन्मस्थली साहिबगंज जिले के भोगनाडीह में आज श्रद्धा और उत्साह का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच स्थानीय ग्रामीणों और जनजातीय समाज के लोगों ने अपने वीर पूर्वजों की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित किए और पारंपरिक वाद्य यंत्रों मांदड़ तथा नगाड़े की थाप पर सामूहिक नृत्य कर उनके संघर्ष को याद किया। इस पावन दिवस पर पूरा भोगनाडीह क्षेत्र वीर शहीदों के जयकारों से गूंज उठा, जो आज भी स्थानीय लोक-संस्कृति में इस विद्रोह की गहरी और अमिट छाप को जीवंत रूप से प्रदर्शित करता है।

राज्यव्यापी स्तर पर इस ऐतिहासिक दिन को मनाने के लिए कई राजनीतिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला भी आयोजित की गई। झारखंड भाजपा ने जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास को सम्मान देने और उनके अधिकारों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए राज्य के सभी 595 मंडलों में विशेष गोष्ठियों का आयोजन किया। वहीं, झारखंड की भौगोलिक सीमाओं से परे इंडियन म्यूजियम कोलकाता ने भी कलकत्ता विश्वविद्यालय के सहयोग से इस ऐतिहासिक विद्रोह पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया, ताकि देश की युवा पीढ़ी को इस महान जनजातीय प्रतिरोध, उनके अभूतपूर्व शौर्य और औपनिवेशिक सत्ता को हिला देने वाले ऐतिहासिक घटनाक्रम से पूरी तरह अवगत कराया जा सके।

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