रांची: बिहार के भोजपुर जिले में एक कथित फर्जी एनकाउंटर में मारे गए सोशल मीडिया एक्टिविस्ट भारत भूषण तिवारी को रांची में सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। इस शोक सभा में नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं, छात्र संगठनों और स्थानीय नेताओं सहित आम नागरिकों ने हिस्सा लिया, जहां न्याय के लिए जमकर नारेबाजी हुई। श्रद्धांजलि सभा जल्द ही एक बड़े विरोध प्रदर्शन में बदल गई, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने इस घटना को एक सोची-समझी साजिश और “ठंडे दिमाग से की गई हत्या” करार देते हुए मामले की सीबीआई (CBI) जांच कराने की पुरजोर मांग की।
इस घटना को लेकर पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश है क्योंकि सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और फेसबुक लाइव स्ट्रीम के सबूतों से पुलिस के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों और स्थानीय कार्यकर्ताओं का आरोप है कि २४ वर्षीय भारत तिवारी ने पुलिस के सामने पहले ही अपने हथियार सौंप दिए थे और आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद निहत्थे तिवारी को बिहार पुलिस के जवानों ने बेहद करीब से गोली मार दी। इसके अलावा, सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी पुलिस की ‘क्रॉसफायर’ वाली थ्योरी को खारिज कर दिया है, क्योंकि रिपोर्ट के अनुसार तिवारी के शरीर पर गोलियों के पांच निशान पाए गए हैं जो आमने-सामने की मुठभेड़ की कहानी से बिल्कुल अलग हैं। सभा में वक्ताओं ने पुलिस बल की इस हिंसक कार्यप्रणाली की कड़े शब्दों में निंदा की।
इस कथित एनकाउंटर के बाद बिहार और झारखंड की राजनीति में भारी उबाल आ गया है और चौतरफा दबाव के बाद सरकार को कदम उठाने पड़े हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार प्रशासन ने स्थानीय थाना प्रभारी (SHO) समेत पांच पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है और दोषी पुलिसवालों के खिलाफ हत्या की एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। इसके साथ ही, इस पूरे मामले की जांच के लिए बिहार राज्य विधि आयोग के अध्यक्ष विनोद कुमार सिन्हा की अगुवाई में एक न्यायिक जांच समिति का गठन किया गया है। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट में भी एक पत्र याचिका दायर कर इस घटना पर स्वतः संज्ञान लेने और निष्पक्ष जांच कराने की अपील की गई है। रांची में श्रद्धांजलि के बाद लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर एक कैंडल मार्च भी निकाला और साफ किया कि जब तक दोषियों को सजा नहीं मिल जाती, यह आंदोलन जारी रहेगा।