Ranchi: झारखंड में दो राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले द्विवार्षिक चुनावों की स्क्रूटनी के दौरान बुधवार को उस समय एक बड़ा सियासी और कानूनी ड्रामा देखने को मिला, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन पत्रों पर सत्तारूढ़ झामुमो-कांग्रेस गठबंधन ने गंभीर तकनीकी आपत्तियां दर्ज कराईं। कांग्रेस ने नाथवानी पर अपने चुनावी हलफनामे में अधूरी जानकारी देने, कुछ कॉलम खाली छोड़ने और नाम के प्रारूप में विसंगतियां रखने का आरोप लगाते हुए उनके नामांकन को तुरंत रद्द करने की मांग की, जिसके कारण चुनाव अधिकारियों ने शुरुआती जांच के बाद उनके पर्चे को होल्ड पर रख दिया।
इस तकनीकी पेंच के सामने आते ही झारखंड विधानसभा सचिवालय में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नियम उल्लंघन का आरोप लगाते हुए परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस बीच, संकट की गंभीरता को देखते हुए परिमल नाथवानी खुद वरिष्ठ भाजपा नेताओं और कानूनी विशेषज्ञों की टीम के साथ रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष पेश हुए। चूंकि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 36 के तहत हलफनामे की लिपिकीय या प्रक्रियात्मक त्रुटियों को सुधारने योग्य (क्यूरेबल डिफेक्ट) माना जाता है, इसलिए निर्वाचन अधिकारी ने नाथवानी को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और लिखित स्पष्टीकरण दाखिल करने के लिए बुधवार सुबह तक का समय दिया।परिमल नाथवानी की ओर से सभी आपत्तियों पर बिंदुवार कानूनी जवाब और आवश्यक स्पष्टीकरण समय सीमा के भीतर जमा कराए गए।
इसके बाद सभी दस्तावेजों की दोबारा समीक्षा करते हुए रिटर्निंग ऑफिसर रंजीत कुमार ने आदेश जारी कर नाथवानी के नामांकन पत्र को पूरी तरह से वैध घोषित कर स्वीकार कर लिया। चुनाव अधिकारी ने स्पष्ट किया कि हलफनामे की पर्याप्तता या सटीकता की जांच स्क्रूटनी के इस सीमित चरण में नामांकन रद्द करने का ठोस आधार नहीं बनती है। इस फैसले के साथ ही नाथवानी का नामांकन आधिकारिक तौर पर सुरक्षित हो गया, जिससे झारखंड की दो सीटों के लिए अब झामुमो के बैद्यनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और निर्दलीय परिमल नाथवानी के बीच मुकाबला तय हो गया है।