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व्यस्त होने का ढोंग या बदतमीज़ी? फोन और वॉट्सऐप पर इग्नोर करने वालों की असली कहानी

आज के डिजिटल दौर में किसी से संपर्क करना सिर्फ एक क्लिक की दूरी पर है। लेकिन इसी दौर में एक नया ट्रेंड शुरू हुआ है—सामने वाले के फोन कॉल और वॉट्सऐप (WhatsApp) मैसेज का जवाब न देना। कुछ लोग ऐसा करके खुद को बहुत बड़ा ‘वीआईपी’ (VIP) या बेहद व्यस्त इंसान दिखाने की कोशिश करते हैं। लेकिन सच तो यह है कि यह आदत आपकी व्यस्तता को नहीं, बल्कि आपकी लापरवाही और दूसरों के प्रति सम्मान की कमी को दर्शाती है।

ब्लू टिक बंद करना: छुपाने की कोशिश

कई लोगों ने वॉट्सऐप पर ‘रीड रिसीट्स’ (Read Receipts) यानी ब्लू टिक को बंद कर रखा है। इसके पीछे की मानसिकता बहुत सिंपल है—”मैं आपका मैसेज देख भी लूं, तो आपको पता न चले और मुझे तुरंत जवाब देने की ज़हमत न उठानी पड़े।”
यह ट्रिक कुछ समय के लिए आपको लोगों के सवालों से बचा सकती है, लेकिन लंबे समय में यह आपके रिश्तों में अविश्वास पैदा करती है। लोग समझ जाते हैं कि आप जानबूझकर उन्हें नज़रअंदाज़ कर रहे हैं।

व्यस्त होना और इग्नोर करना: दोनों में बड़ा फर्क है

* सच्ची व्यस्तता: हर कोई अपनी ज़िंदगी, नौकरी और परिवार में व्यस्त है। अगर आप सच में किसी ज़रूरी काम में हैं, तो कॉल कट करके एक छोटा सा मैसेज छोड़ सकते हैं—”मैं मीटिंग में हूँ, बाद में बात करता हूँ।”
* दिखावे की व्यस्तता: मैसेज देखकर भी दो-दो दिन तक जवाब न देना, कॉल बैक न करना और फिर यह बहाना बनाना कि “मैं बहुत बिजी था।” आज के समय में कोई भी इंसान २४ घंटे इतना व्यस्त नहीं होता कि वह एक मिनट का समय निकालकर जवाब न दे सके।

इस आदत का आपके रिश्तों पर क्या असर पड़ता है?

1. भरोसा कम होना: जब आप बार-बार लोगों को इग्नोर करते हैं, तो लोग आप पर भरोसा करना बंद कर देते हैं।

2. ज़रूरी समय पर अकेले पड़ जाना: याद रखिए, जो लोग आज आपकी परवाह में आपको मैसेज या कॉल कर रहे हैं, कल वो आपकी इस आदत से तंग आकर दूरी बना लेंगे। जब आपको सच में किसी की ज़रूरत होगी, तब शायद आपके पास कोई नहीं होगा।

3. घमंडी छवि: न चाहकर भी समाज में आपकी छवि एक घमंडी और मतलबी इंसान की बन जाती है।

एक छोटा सा मैसेज, बचा सकता है रिश्ता

डिजिटल मैनर्स (Digital Etiquette) भी कोई चीज़ होती है। अगर आप किसी का फोन नहीं उठा पाए, तो बाद में ‘कॉल बैक’ करना आपकी ज़िम्मेदारी है। अगर मैसेज देखा है, तो उसका जवाब भले ही छोटा दें, लेकिन दें ज़रूर। खुद को व्यस्त दिखाने के चक्कर में उन लोगों को न खोएं जो आपकी परवाह करते हैं। व्यस्त होना अच्छी बात है, लेकिन बदतमीज़ होना बिल्कुल नहीं।

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