खेती और किसानी की नींव को मजबूत करने में सहकारिता की शक्ति की बड़ी भूमिका है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए वर्तमान केन्द्र सरकार ने अलग से सहकारिता मंत्रालय का गठन किया है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को बढ़ावा मिले। कृषि प्रणालियों के आधुनिकीकरण के बिना विकसित भारत का संकल्प भी अधूरा होगा ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे लोगों की आय बढ़ाने में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका है। छोटे संसाधनों को एक साथ जोड़ने पर बड़ा काम पूरा किया जा सकता है। भारत में गाँवों की प्राचीन व्यवस्था में इसी मॉडल का पालन किया जाता था। सहकारिता में दैनिक जीवन से जुड़ी सामान्य प्रणाली को एक बड़े उद्यमी प्रणाली में बदले की क्षमता है यह ग्रामीण तथा कृषि अर्थव्यवस्था में बदलाव लाने का एक कारगर तरीका है। सहकारिता के नए मंत्रालय के माध्यम से सरकार का लक्ष्य भारत के कृषि क्षेत्र की बिखरी ताकतों को एक साथ लाना है। सहकारिता का लाभ अब मछुआरों और पशुपालकों तक भी पहुंच रहा है।
मत्स्य पालन क्षेत्र में 25,000 से अधिक सहकारी समितियां कार्यरत हैं। आने वाले वर्षों में 2 लाख सहकारी समितियों की स्थापना का लक्ष्य तय किया गया है। सहकारी समितियों में सामूहिक शक्ति के साथ किसानों की व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान करने की क्षमता है I कृषि प्रणालियों के आधुनिकीकरण के द्वारा भारत को विकसित राष्ट्र के निर्माण में मदद मिलेगी। सहकारी समितियाँ जन औषधि केन्द्र के रूप में भी कार्य कर रही है। सहकारी समितियां अब गांवों में सामान्य सेवा केन्द्रों के रूप में काम कर रही हैं और सैकड़ों सुविधाएं प्रदान कर रही हैंI विकसित भारत की यात्रा में सहकारी संस्थाओं की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। आत्मनिर्भर भारत के बिना विकसित भारत संभव नहीं है प्राकृतिक खेती और किसानों को ऊर्जादाता और उर्वरक दाता बनाने में सहकारी समितियों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। सहकारी समितियों से जुड़े किसानों के मिट्टी के स्वास्थ्य का विश्लेषण करना समय की मांग है जनता के अंदर विश्वास बढ़ाने के लिए सहकारी संगठनों या समितियों के चुनाव में पारदर्शिता की आवश्यकता है।
आदर्श एवं सुसज्जित सहकारिता के माध्यम से किसानों और समाज के अन्य लोगों में सामाजिक सद्भाव और शांति की भावना को बढ़ावा दिया जा सकता है। सहकारिता एक ऐसा मंच है जो लोगों को एक साथ लाता है, जहाँ वे सामान्य लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मिलकर काम करते हैं। इससे आपसी समझ, सम्मान और विश्वास बढ़ता है, जो सामाजिक सद्भाव और शांति के लिए आवश्यक हैI सहकारिता विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों को एक साथ लाती है, जिसमें वे एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं और एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सहानुभूति विकसित करते हैं। सहकारिता किसानों और अन्य लोगों को उनकी उपज या सेवाओं के लिए बेहतर मूल्य प्राप्त करने एवं ऋण प्राप्त करने और अन्य आर्थिक अवसरों तक पहुंचने में मदद करती है।
इससे गरीबी और असमानता कम होती है, जो सामाजिक अशांति का एक प्रमुख कारण है। सहकारिता विभिन्न समुदायों के विकास परियोजनाओं को शुरू करने और लागू करने में मदद करती है, जैसे कि बुनियादी ढांचे का विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार। इससे समुदायों में बेहतर जीवन स्तर और अधिक सामाजिक सद्भाव स्थापित होता है। सहकारिता लोगों को राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेने और अपने अधिकारों और हितों की रक्षा करने के लिए सशक्त बनाती है। इससे सरकार और लोगों के बीच अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही आती है, जो सामाजिक शांति के लिए आवश्यक है। इसके माध्यम से किसान, व्यापारी और समाज अन्य लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करके न केवल अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार कर सकते हैं, बल्कि सामाजिक सद्भाव और शांति भी स्थापित कर सकते हैं। यह एक शक्तिशाली उपकरण है जो समाज को एकजुट कर सकता है और सभी के लिए बेहतर भविष्य निर्माण कर सकता है।
निश्चित रूप से सहकारिता के द्वारा ग्रामीण लघु उद्योग और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दिया जा सकता हैI सहकारित एक ऐसा तंत्र है जहाँ व्यक्ति मिलकर काम करते हैं, संसाधनों को साझा करते हैं, और सामूहिक रूप से लाभान्वित होते हैंI इससे इन उद्योगों को कई तरह से फायदा हो सकता हैI इसके द्वारा ग्रामीण उद्यमी एक- दूसरे से पैसा उधार ले सकते हैं या सामूहिक रूप से ऋण प्राप्त कर सकते हैं, जिससे उन्हें अपने व्यवसाय शुरू करने या विस्तारित करने के लिए आवश्यक पूँजी मिल सकती है। सहकारिता के माध्यम से, उद्यमी अपने उत्पादों को एक साथ बेच सकते है, जिससे उनकी पहुंच बड़े बाजारों तक हो सकती है और उन्हें बेहतर कीमते मिल सकती है।
सहकरिता के माध्यम से, उद्यमी एक- दूसरे से सीख सकते हैं और अपने कौशल को विकसित कर सकते हैं, जिससे उनके उपदों की गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार हो सकता है। सहकारिता के माध्यम से, ग्रामीण उद्यमी सरकारी योजनाओं और सहायता का लाभ उठा सकते हैं, जो आमतौर पर व्यक्तिगत उद्यमियों की तुलना में सहकारी समितियों के लिए अधिक सुलभ होते हैं। सहकारी समिति एक स्वहित सदस्य-स्वामित्व वाला संगठन है जिसे सामान्य आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बनाया गया है। सहकारी समितियाँ स्व सहायता, पारस्परिक सहायता एवं सामुदायिक कल्याण पर बल देते हैं। महिला सहकारी समितियां और ग्रामीण सहकारी समितियां आर्थिक अवसर पैदा करने और वंचित क्षेत्रों के जीवन स्तर में सुधार लाने पर ध्यान केन्द्रित करती हैं।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय के द्वारा लोगों को आधुनिकतम ज्ञान प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में सहकारी समितियों को जीवन्त और सफल व्यावसायिक इकाइयों के रूप में परिवर्तित करने के लिए सहकारिता मंत्रालय प्रतिबद्ध है। पिछले 5 साल में देश में 2 लाख बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियों की स्थापना के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के तहत अब तक 35,395 नई सहकारी समितियों बनाई जा चुकी है जिनमें 6,182 बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (MPACS) 27,562 डेयरी और 1651 मत्स्य सहकारी समितियों शामिल हैंI भूमिहीन और पूंजी हीन व्यक्ति के लिए सहकारिता क्षेत्र से ही समृद्धि का रास्ता खुल रहा हैI
श्री शाह का कहना है कि सहकारिता क्षेत्र कृषि और किसानों की समृद्धि के लिए तीन राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समितियों का गठन किया गया है। राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक लिमिटेड (NCOL) किसानों के आर्गेनिक उत्पादों की प्रामाणिकत्ता, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और उनकी मार्केटिंग सुनिश्चित करती है जिससे किसानों को उनके उत्पादों का अच्छा मूल्य मिल सके। श्री शाह का कहना है की राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL) किसानों के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात करने से सम्बन्धित सभी सुविधाएं उपलब्ध कराती है जिसका पूरा मुनाफा किसानों को मिलता है।
भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSAY) भारत के परंपरागत बीजों के संरक्षण, संग्रहण और उत्पादन की दिशा में काम करती है। सहकारिता मंत्रालय ने पिछले चार वर्षों में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS), डेयरी, मत्स्य, सहकारी बैंक, चीनी सहकारी समितियों और शासन प्रणालियों को मजबूत करने के लिए 100 से अधिक पहल की है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय सहकारी नीति – 2025 देश में सतत सहकारी विकास के लिए व्यापक रोड मैप प्रदान करती है।
इस रोड मैप में भारत सरकार की योजनाओं, जैसे प्रधान मंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY), राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD) और अन्य के साथ समन्वय भी शामिल है ताकि जमीनी स्तर पर सहकारी इकोसिस्टम को मजबूत किया जा सके सहकारी समितियों के नेतृत्व में श्वेत क्रांति 2.0 के माध्यम से अगले 5 वर्षो में सहकारिता समितियों द्वारा 50% दूध कलेक्शन के लक्ष्य की ओर भी तेजी से बढ़ा जा रहा है। इसके तहत अब तक 15, 691 डेयरी सहकारी समितियां पंजीकृत की गई है और 11,871 मौजूदा डेयरी सहकारी समितियों को मजबूत किया गया है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) और 15 राज्यों में 25 मिल्क यूनियन ने डेयरी सहकारी समितियों में बायोगैस संयंत्र स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। अंत में हम निष्कर्ष के रूप में कह सकते हैं कि प्रदेश के सहकारिता मंत्री श्री जे० पी० एस० सिंह राठौर एवं केन्द्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के कुशल नेतृत्व में सहकारिता के क्षेत्र में चतुर्दिक उन्नति हो रही है .
अविनाश चौबे
B.Sc Third Year
श्री कृष्ण सुदामा संस्थान, कैथी, वाराणसी
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