पैक्स का भविष्य वर्तमान स्वरूप में उज्जवल है जो कम्प्यूटरीकरण और व्यवसायों के माध्यम से आत्म निर्भर और अधिक कुशल बनने की ओर अग्रसर है। सरकार इसे एक वित्तीय हब के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है, जो 29 विभिन्न व्यवसायों को जोड़ेगा और ग्रामीण स्तर पर कई सेवाओं को एक ही छत के नीचे लाएगा। इसके लिए नई पैक्स (PACS) की स्थापना और मौजूदा पैक्स के कम्प्यूटरीकरण पर जोर दिया जा रहा है।
पैक्स (PACS): ग्रामीण अर्थव्यवस्था के पुनरुद्धार का आधार
पैक्स ग्रामीण विकास की रीढ़ हैं। इसलिए इनके सुदृढ़ीकरण और पुनरुद्धार से बहुत जल्द ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास को बढ़ावा मिलेगा। पैक्स से जुड़ी गतिविधियों के बढ़ने से जहाँ मौसमी बेरोजगारी खत्म होने की उम्मीद की जा रही है वहीं इससे करीब एक लाख पैक्स से सीधे जुड़े किसानों को विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय-सृजन में फायदा होगा। सरकार से समृद्धि की परिकल्पना के माध्यम से विकसित भारत का निर्माण करने के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत होना बहुत जरूरी है। । यह तभी सम्भव है जब गाँवों में कारोबारी दायरा और रोजगार के अवसर बढ़ेगें। इस मूल बात को समझते हुए केंद्र सरकार ने सहकारिता मंत्रालय के गठन के साथ ही सहकारिता की प्राथमिक इकाई प्राथमिक कृषि ऋण समिति को सशक्त बनाने की पहल शुरू कर दी थी।
पैक्स को सुदृढ़ बनाने के लिए 5,000 करोड़ रुपये का विशेष पॅकेज
पैक्स को मजबूती प्रदान करने के लिए सबसे पहले पारदर्शिता को बढ़ावा दिया गया जिसके तहत सभी सक्रिय पैक्स का कम्प्यूटीकरण करने और चुनाव प्रक्रिया को भाई-भतीजावाद से मुक्त करने का फैसला किया गया। इसके बाद इसे आर्थिक रूप से व्यावहारिक बनाने की पहल की गई जिसके तहत पैक्स को करीब दो दर्जन व्यावसायिक स गतिविधियाँ शुरू करने की मंजूरी दी गई। इन फैसलों को कानूनी रूप देने के लिए पैक्स के मॉडल बायलॉज (संविधान) में बदलाव किया गया जो पूरे देश में लागू हो चुका है। पैक्स को सुदृढ़ बनाने के लिए 5,000 करोड़ रुपये का विशेष पॅकेज भी दिया गया है।
सहकारिता की क्षमता को अब देश के भविष्य को आकार देने वाले क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है
सम्पूर्ण विश्व में अन्तर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के स्वागत की तैयारियों जो-शोर से चल रही हैं। यह ऐसे समय में हो रहा है जब भारत का सहकारिता क्षेत्र मजबूत स्थिति में है और देश भर में नई, मजबूत एवं तेजी से उभरती हुई प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ यानी पैक्स का प्रसार हो रहा है। आर्थिक रूप से एवं प्रशासनिक सुधारों से लैस ये पैक्स अब ग्रामीम और कृषि प्रधान भारत में प्रधानमंन्त्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के सपने को साकार करने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दूसरे कार्यालय में सहकारिता मन्त्रालय का गठन करने और गृहमंत्री अमित शाह को इसकी दायित्व सौंपने के तुरन्त बाद सहकारिता क्षेत्र में बदलाव की बयार बहने लगी। सहकारिता की क्षमता को अब देश के भविष्य को आकार देने वाले क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। अमित शाह सहकारिता क्षेत्र के पुराने जानकार है। वह सहकारिता क्षेत्र के विकास में बाधा डालने वाले कारणों से अच्छी तरह परिचित थे। इन बाधाओं में पैक्स के विविधकीकरण की कमी थी, जिसे उन्होंने लगभग समाप्त कर दिया है। अमित शाह ने पैक्स के लिए जो सबसे महत्वपूर्ण कार्य किया, वह उनके बायलाज यानी उपनियमों में बदलाव लाना था।
पैक्स कामन सर्विस सेप्टर (सीएससी) के रूप में
पैक्स की समस्याओं से छुटकारे के लिए माडल बादलाव लाकर उन्हें बहुउद्देशीय बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे पैक्स को अपने व्यवसाय को 25 से अधिक व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़कर विविधता लाने में मदद मिली है। अब वे कामन सर्विस सेप्टर (सीएससी) के रूप में काम कर रहे हैं, जो ग्रामीण भारत में 300 से अधिक ई-सेवायें जैसे- बैंकिंग, बीमा, आधार, नामांकन/अपडेशन, स्वास्थ्य सेवाएं पैन कार्ड और आईआर सीटीसी/ बस/ हवाई टिकट आदि सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। अब तक 35,000 से अधिक पैक्स ने ग्रामीण नागरिकों को ये सेवाएं प्रदान करना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही अब उन्हें प्रधानमन्त्री किसान समृद्धि केन्द्र, जल समितियाँ, L.P.G. वितरकों, खुदरा पेट्रोल/डीजल की दुकानों, किसान उत्पादक संगठनों आदि के रूप में कार्य करने में भी सक्षम बनाया जा रहा है। पैक्स अब गाँवों में सस्ती दर पर गुणवत्ता वाली जनेरिक दवाओं के वितरण के लिए प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र के रूप में भी काम कर रहे है, जिससे ग्रामीण आबादी के लिए सस्ती दवाएं उपलब्ध कराते हुए आय का एक स्रोत पैदा हो रहा है। ये सभी प्रयास पैक्स की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए किए जा रहे हैं।
पैक्स का कम्प्यूटीकरण
सहकारिता मन्त्रालय का अगला महत्वपूर्ण कार्य इस क्षेत्र में लोगों का विश्वास जीतना है, जो दशकों से कुप्रबन्धन से ग्रस्त था। इसमें पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 63,000 पैक्स का कम्प्यूटीकरण किया जा रहा है। अब तक 23,000 से अधिक पैक्स को एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग सॉफ्टवेयर के साथ एकीकृत किया भी जा चुका है। पैक्स के कम्प्यूटीकरण से उन्हें सीधे राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीय विकास बैंक यानी नावार्ड से जोड़ा जा सकेगा। कामन अकाउंटिग सिस्टम और Management Information system से संचालन में एकरूपता आएगी। इससे पैक्स संचालन में जनता का विश्वास बढ़ेगा। सहकारिता क्षेत्र में हुई उन अनूठी पहलों से यह क्षेत्र अब नए आत्मविश्वास के साथ पूरे देश में संगठित रूप में कार्य कर रहा है, जो इसके लिए बहुत फायदेमंद है। अब सहकारी क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों से जिला सहकारी बैंकों में बैंक खाता खोलने का आहवान किया जा रहा है ताकि वे स्वावलम्बी बनें।
सहकारी समितियों के बीच सहयोग एक मजबूत आर्थिक सिद्धांत है जो मजबूत सहकारी क्षेत्र के निर्माण के लिए जरूरी है। वर्ष 2024 में सहकारिता मन्त्रालय का दूसरी बार कार्यभार संभालते हुए अमित शाह ने जमीनी स्तर पर सहकारी नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करके इस क्षेत्र को मजबूत करने का संकल्प लिया है। नीतिगत ढाँचा बनाने के साथ ही इन नीतियों को जमीनी स्तर पर लाने का प्रयास किया जा रहा है।
सहकारिता मन्त्रालय द्वारा की गई सबसे महत्वपूर्ण पहल में से एक सहकारी क्षेत्र में ‘विश्व का सबसे बड़ा विकेन्द्रीकृत अनाज भण्डार कार्यक्रम’ है। इस योजना का उद्देश्य पैक्स स्तर पर अनाज भंडार के लिए विकेंद्रीकृत गोदाम, कस्टम हायरिंग सेंटर, प्राथमिक प्रसंस्करण ईकाइयों और अन्य कृषि अवसंरचनाएं बनाना है। इन गोदामों का उद्देश्य कृषि और इससे बड़े कामों के लिए इस्तेमाल करना है। इससे खाद्यान की बर्बादी और परिवहन लागत में कमी आएगी, किसानों को उनकी उपज के बेहतर दाम मिलेंगे और विभिन्न कृषि जरूरतों को पैक्स स्तर पर ही पूरा किया जा सकेगा। चूँकि पैक्स ग्रामीण विकास की रीढ़ है इसलिए इनके सुदृढ़ीकरण और पुनरुद्धार से बहुत शीघ्र ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास को बढ़ावा मिलेगा। पैक्स ग्रामीण स्वरोजगार को बढ़ावा देने में वित्तीय सहायता, कृषि इनपुट की आपूर्ति, विपणन सहायता और विभिन्न सेवाओं के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और ग्रामीण समुदायों को रोजगार मिलता है। यह जमीनी स्तर पर एक सहकारी संस्था के रूप में कार्य करता हैं, किसानों को ऋण प्रदान करता है। पैक्स ग्रामीण अर्थव्यस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कुछ पैक्स सहकारी टैक्सी सेवाओं की शुरुवात कर रहे हैं, जिससे ग्रामीण परिवहन में सुधार होता है और स्थानीय निवासियों के लिए रोजगार सृजित होता है।
पैक्स ग्रामीण सहकारी ढांचे की मूल इकाई है, जो सहकारी आन्दोलन की जड़े जमाते हैं और इसे मजबूत एवं शक्तिशाली बनाते हैं। पैक्स से जुड़े किसान सौर कृषि जल पम्प अपना सकते हैं और अपने खेतों में फोटोवोल्टिक मोड्यूल/ चयन कर सकते हैं। आँकड़े बताते है कि अब तक पैक्स ने (सीएससी) खोलने में सबसे ज्यादा दिलचस्पी दिखाई दी है। देश भर में 44,116 पैक्स इस समय (सीएससी) के रूप में कार्य कर रहे है। इन केन्द्रों को चलाने के लिए स्थानीय युवाओं को ही चुना जाता है, जिससे उनके लिए प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। सरकार की इन पहलों से पैक्स ग्रामीण रोजगार पैदा करने के बड़े वाहक के रूप में उभर रहे हैं। सशक्त एवं सक्षम गांव, विकसित भारत के निर्माण, स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग और भारतीय सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाई पर पहुंचाने में पैक्स की भूमिका अब महत्वपूर्ण हो गई है। सहकारी क्षेत्र के विकास पर ही देश का विकास निर्भर है। युवा भारत में सहकारिता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। युवा अपने नए विचारों, उर्जा और कौशल के साथ सहकारिता को एक गतिशील और आधुनिक स्वरूप प्रदान कर सकते हैं। वे नवाचार को बढ़ावा देते हैं, उद्यमिता को प्रोत्साहित कर सहकारी समितियों को सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद कर
(अखिलेन्द्र प्रताप सिंह (सन्नी), कोषाध्यक्ष, भारतीय जनता काशी प्रांत, उ ० प्र ०)