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अर्थ फाउंडेशन ने सेंट्रल एकेडमी स्कूल, कांके रोड में आयोजित किया ‘कबाड़ से जुगाड़’ कार्यक्रम, बच्चों ने बनाई अद्भुत कलाकृतियां

​रांची: सामाजिक संस्था अर्थ फाउंडेशन के तत्वावधान में कांके रोड स्थित सेंट्रल एकेडमी स्कूल में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी जी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के अभियान को धरातल पर उतारते हुए एक भव्य ‘कबाड़ से जुगाड़’ कार्यक्रम का विधिवत आयोजन किया गया। दीपावली पर्व के पावन अवसर पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में सेंट्रल एकेडमी स्कूल कांके रोड के छात्र-छात्राओं ने अपने हुनर और रचनात्मकता का शानदार प्रदर्शन करते हुए बेकार और अनुपयोगी वस्तुओं (वेस्ट मटेरियल) से एक से बढ़कर एक खूबसूरत कलाकृतियां तैयार कीं।

​इस अवसर पर सामाजिक संस्था अर्थ फाउंडेशन कि ओर से बच्चों के लिए रंगोली मेकिंग प्रतियोगिता, दीया मेकिंग प्रतियोगिता और वेस्ट मटेरियल से सजावटी सामान बनाने की प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिसमें सैकड़ों विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दीपावली के पावन पर्व पर हमें यह संकल्प लेने की आवश्यकता है कि हम विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और ‘लोकल फॉर लोकल’ की भावना को अपनाते हुए अपने देश के स्थानीय कारीगरों, उत्पादों और स्वदेशी चीजों को बढ़ावा दें। जब देश का हर नागरिक विदेशी उत्पादों का त्याग कर स्थानीय स्तर पर बनी वस्तुओं को अपनाएगा, तभी हमारा देश सच्चे अर्थों में आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार कर पाएगा।

दीपावली के समय घरों की साफ-सफाई के दौरान कई ऐसी वस्तुएं बेकार समझकर फेंक दी जाती हैं, जिन्हें थोड़ी सी कलाकारी से दोबारा उपयोगी बनाया जा सकता है। बच्चों ने अपनी सृजनात्मकता का परिचय देते हुए इन्हीं खराब पड़ी स्वदेशी वस्तुओं से घर की सजावट के लिए आकर्षक सामग्रियां बनाईं।

​कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में अर्थ फाउंडेशन के ट्रस्टी दीपक बंका, समाजसेविका दीपा बंका, सेंट्रल एकेडमी के अकादमिक डायरेक्टर ए. के. रॉय, प्राचार्या स्नेहा रॉय, रिलेशंस के निर्देशक आशुतोष द्विवेदी समेत कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। अतिथियों ने बच्चों की कलाकृतियों की सराहना की और प्रतियोगिता में शामिल सभी विद्यार्थियों को उपहार देकर प्रोत्साहित व सम्मानित किया।

​इस कार्यक्रम के माध्यम से समाज और पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बेहद सकारात्मक और सार्थक संदेश दिया गया। ‘कबाड़ से जुगाड़’ की यह पहल पर्यावरण संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वेस्ट मटेरियल के पुनर्चक्रण (रीसायकल) से कचरे को कम किया जा सकता है, जिससे हमारी प्राकृतिक संपदा सुरक्षित रहती है और रांची को हरा-भरा व स्वच्छ बनाने का संकल्प मजबूत होता है। दीपावली केवल दीये जलाने का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी का भी प्रतीक है।

​कार्यक्रम के अंत में एक बेहद प्रेरक पहल करते हुए सभी बच्चों को यह शपथ दिलाई गई कि उनके द्वारा बनाई गई इन सुंदर कलाकृतियों को वे उन निर्धन और जरूरतमंद परिवारों के घरों में जाकर उपहार स्वरूप भेंट करेंगे, जो किसी कारणवश दीपावली की खुशियों से वंचित रह जाते हैं। जब ये कलाकृतियां उन घरों में पहुंचेंगी और उनके चेहरों पर मुस्कान बिखेरेंगी, तभी इस रचनात्मक प्रयास और मेहनत की सच्ची दीपावली सार्थक होगी।

​इस सफल एवं भव्य आयोजन में अभिनय हो, श्रावणी मजूमदार, मीनाक्षी कुमारी, स्मिता सरकार सहित विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं और सैकड़ों विद्यार्थियों का सराहनीय योगदान रहा।

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