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झारखंड जलसहिया का ऐलान: 2 हजार नहीं, 18 हजार चाहिए, नहीं तो आंदोलन तेज होगा

Ranchi: झारखंड की 30 हजार से अधिक जलसहिया दीदियों में सरकार के प्रस्ताव को लेकर भारी नाराजगी है। पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद के साथ 12 अक्टूबर को हुई प्रदेश कमिटी की वार्ता के बाद मंत्री ने न्यूनतम मजदूरी 2,000 रुपये से थोड़ा अधिक बढ़ाने का आश्वासन दिया है, लेकिन झारखंड राज्य जल सहिया कर्मचारी संघ ने इसे नाकाफी बताते हुए न्यूनतम मजदूरी 18,000 रुपये करने की मांग पर अड़ गई है।

संघ की प्रदेश अध्यक्ष गायत्री देवी ने महत्वपूर्ण सूचना जारी करते हुए बताया कि 12 अक्टूबर को रांची में मंत्री के साथ हुई वार्ता में पांच सूत्री मांगों में से चार पर लगभग सहमति बन गई है। इसमें लंबे समय से लंबित बकाया मानदेय का भुगतान, शौचालय निर्माण और जल जीवन मिशन की प्रोत्साहन राशि, हर महीने मोबाइल रिचार्ज की राशि, सभी जलसहिया बहनों के लिए सरकारी पहचान पत्र और मास्टर जलसहिया के लिए अलग से मानदेय भुगतान शामिल है। इसके अलावा नगर निगम और नगर परिषद क्षेत्र में काम कर रही जलसहिया बहनों के भविष्य को लेकर भी सकारात्मक बातचीत हुई है।

लेकिन असली लड़ाई न्यूनतम मजदूरी की है। सरकार जहां 2,000 रुपये से ऊपर देने की बात कह रही है, वहीं संघ का साफ कहना है कि यह मजाक है। आज के महंगाई के दौर में जब एक दिहाड़ी मजदूर भी दिन का 500 रुपये कमाता है, तो महीने भर गांव-गांव घूमकर पानी की गुणवत्ता जांचने, जलमीनार की देखरेख करने, लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने वाली जलसहिया को 2,000 रुपये देना उसके श्रम का अपमान है।

गायत्री देवी ने कहा, “हम सरकार से भीख नहीं, अपना हक मांग रहे हैं। झारखंड सरकार की ही न्यूनतम मजदूरी दर 350 रुपये प्रतिदिन है, उसके हिसाब से भी हमारा वेतन 10,500 रुपये होना चाहिए। लेकिन हम 18,000 रुपये की मांग इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हम कुशल कर्मी की श्रेणी में आते हैं और पिछले 10 सालों से बिना किसी स्थायी वेतन के सेवा दे रहे हैं। 2,000 में क्या होता है? बच्चों की फीस भी नहीं निकलती।”

उन्होंने बताया कि मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने मजदूरों की भावनाओं को समझा है और उन्होंने 25 या 26 अक्टूबर को फिर से बैठक के लिए बुलाया है। मंत्री ने भरोसा दिलाया है कि वह मुख्यमंत्री और वित्त विभाग से बात करके 2,000 से अधिक दिलाने का हरसंभव प्रयास करेंगे।

संघ ने सभी 24 जिलों के जिला अध्यक्ष, जिला सचिव, जिला कोषाध्यक्ष और सभी जलसहिया बहनों से अपील की है कि वे एकजुट रहें और अफवाहों पर ध्यान न दें। संगठन आपके अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है। अगर 25 अक्टूबर की बैठक में 18,000 रुपये की मांग पर लिखित आश्वासन नहीं मिला, तो नवंबर के पहले सप्ताह में रांची में विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

गौरतलब है कि झारखंड में जलसहिया जल जीवन मिशन की रीढ़ हैं। हर गांव में पानी की सप्लाई इन्हीं के भरोसे चलती है, फिर भी इन्हें न तो सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिला है और न ही नियमित वेतन। अब देखना होगा कि सरकार 2,000 का लॉलीपॉप देती है या 18,000 देकर जलसहिया बहनों को सम्मान देती है।

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