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टाटा ट्रस्ट्स ने डिमेंशिया की समय पर पहचान पर दिया जोर, ‘वजूद रहे मौजूद’ अभियान से बढ़ाई जागरूकता

रांची: विश्व अल्जाइमर माह के अवसर पर टाटा ट्रस्ट्स ने ‘वजूद रहे मौजूद’ अभियान के माध्यम से डिमेंशिया की समय पर पहचान और निदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पहल की है। भारत में करीब 88 लाख बुजुर्ग डिमेंशिया के साथ जीवन बिता रहे हैं, जबकि करीब 90 प्रतिशत मामलों का निदान नहीं हो पाता है। वर्ष 2036 तक डिमेंशिया से प्रभावित लोगों की संख्या 1.69 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।

अभियान के जरिए लोगों से याददाश्त, व्यवहार और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता में होने वाले बदलावों को उम्र का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज नहीं करने की अपील की गई है। टाटा ट्रस्ट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सिद्धार्थ शर्मा ने कहा कि डिमेंशिया आने वाले वर्षों में भारत के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है और शुरुआती पहचान के साथ प्रभावित लोगों तथा उनके देखभालकर्ताओं के लिए मजबूत व्यवस्था जरूरी है।

टाटा ट्रस्ट्स के वरिष्ठ स्वास्थ्य सलाहकार डॉ. अनुर कुरपाड ने समय रहते निदान के साथ मधुमेह, उच्च रक्तचाप और जीवनशैली से जुड़े जोखिम कारकों पर ध्यान देने की जरूरत बताई। अभियान में चिकित्सकों, देखभालकर्ताओं और शुरुआती अवस्था के डिमेंशिया से जीवन बिता रहे लोगों को शामिल किया गया है। टाटा ट्रस्ट्स तेलंगाना में ‘एल्डर स्प्रिंग’ और ‘एल्डर लाइन 14567’ जैसी पहलों के साथ सेंटर फॉर ब्रेन रिसर्च के टाटा लॉन्गिट्यूडिनल स्टडी ऑफ एजिंग तथा डिमेंशिया इंडिया अलायंस को भी सहयोग दे रहा है। अभियान में देश में डिमेंशिया से प्रभावित लोगों और उनके परिवारों के लिए एकीकृत देखभाल व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।

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