रांची: चिकित्सा कूटनीति का एक अनोखा नजारा पेश करते हुए, झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री ने पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के घायल वीआईपी का इलाज और सुरक्षा करने का बड़ा दिल दिखाया है। इस घोषणा से रांची के लोगों में गर्व की लहर दौड़ गई है—और साथ ही उन स्थानीय नागरिकों में भारी भ्रम फैल गया है जिन्होंने हाल ही में किसी सरकारी अस्पताल का दौरा करने की गुस्ताखी की थी।
सूत्रों की मानें तो रांची अब खुद को “वीवीआईपी हेल्थकेयर सैंक्चुअरी” (वीआईपी स्वास्थ्य शरणस्थली) के रूप में ब्रांड कर रहा है। फॉर्मूला सीधा है: यदि आप एक बड़े राजनेता हैं, तो झारखंड आपके लिए रेड कार्पेट बिछाएगा, बेहतरीन डॉक्टरों की फौज खड़ी करेगा और सुरक्षा का ऐसा घेरा देगा कि बीमारी भी पास आने से डरे।
हालांकि, आम जनता को इस विज्ञापन के नियम और शर्तें न पढ़ने की सलाह दी जाती है।
मेडिकल का ‘महा-विरोधाभास’
इस प्रस्ताव के पीछे छिपे मज़ाक को रांची के उन नागरिकों ने तुरंत पकड़ लिया, जो यहां के “मेडिकल माइग्रेशन” (चिकित्सा पलायन) के खेल से अच्छी तरह वाकिफ हैं। यह एक खुला रहस्य है कि जब झारखंड के अपने किसी वीआईपी को हल्की सी खांसी भी आती है या रूटीन चेकअप कराना होता है, तो उनका पहला कदम दिल्ली, मुंबई या चेन्नई के लिए हवाई टिकट बुक करना होता है।
“हमारा हेल्थकेयर सिस्टम वर्ल्ड-क्लास है, बशर्ते आप दूसरे राज्य के नेता हों,”
हैदराबाद की मेडिकल ट्रिप के लिए अपना सूटकेस पैक करते हुए एक स्थानीय अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया। “जब हमारे अपने वीआईपी बीमार पड़ते हैं, तो वे दूसरे राज्यों की सुरक्षा और डॉक्टरों पर भरोसा करते हैं। यह अंतर-राज्यीय अदला-बदली की एक खूबसूरत व्यवस्था है। हम उनके नेताओं का इलाज करेंगे, वे हमारा करेंगे। इसमें सबका फायदा है, सिवाय स्थानीय टैक्सपेयर्स के।”
वीआईपी इलाज के विशेष इंतजाम
खबर है कि रांची के इस विशेष वीआईपी प्रोटोकॉल में ऐसी अत्याधुनिक सुविधाएं शामिल हैं जो आम नागरिकों को नसीब नहीं होतीं:
* ब्यूरोक्रेटिक बैंड-एड (नौकरशाही पट्टी): एक ऐसी विशेष पट्टी जो राजनीतिक मतभेदों और घावों को तुरंत ठीक कर देती है।
* सुरक्षात्मक शामक (सिक्योरिटी सिडेटिव): एक ऐसा इलाज जिसमें अस्पताल में नर्सों से ज्यादा पुलिस के जवान तैनात कर दिए जाते हैं, ताकि मरीज को आराम महसूस हो।
* मीडिया-रेडी वार्ड: ऐसे कमरे जहां प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए परफेक्ट लाइटिंग होती है, ताकि देश को बताया जा सके कि माननीय की सेहत में कितना सुधार है।
इलाज से पहले सुरक्षा
स्वास्थ्य मंत्री ने जोर देकर कहा कि इलाज के साथ-साथ सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह एक बेहतरीन रणनीति है। अगर किसी अस्पताल को चारों तरफ से पुलिस कमांडो घेर लेंगे, तो बाहर से किसी को यह नहीं दिखेगा कि अंदर की एक्स-रे मशीनें काम कर रही हैं या नहीं, या अस्पताल की फार्मेसी में पेरासिटामोल बची भी है या नहीं।
चूंकि झारखंड अब दूसरे राज्यों के घायल राजनीतिक दिग्गजों के लिए अपनी बाहें फैला रहा है, इसलिए स्थानीय निवासियों से अनुरोध है कि वे फिलहाल बीमार न पड़ें। एक अदृश्य जनहित जारी संदेश में जैसे कहा गया हो: “कृपया अभी स्वस्थ रहें। हमारे सभी बेहतरीन डॉक्टर इस वक्त दूसरे राज्य के माननीय का इंतजार कर रहे हैं, और हमारे अपने स्थानीय वीआईपी इस वक्त एयरपोर्ट पर हैं।”