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न्याय के मंदिर’ में ही अन्याय? NUSRL रांची की सुरक्षा निविदा पर उठे गंभीर सवाल, ‘निविदा फिक्सिंग’ का आरोप

रांची: विडंबना देखिए, न्याय की शिक्षा देने वाले प्रतिष्ठित संस्थान नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची की अपनी ही प्रशासनिक प्रक्रिया विवादों के घेरे में है। यूनिवर्सिटी द्वारा सुरक्षा गार्डों की बहाली के लिए जारी की गई निविदा (Tender) पर “पक्षपात” और “अन्याय” के गंभीर आरोप लगे हैं। आलोचकों का कहना है कि निविदा की शर्तें किसी खास बड़ी एजेंसी को फायदा पहुँचाने के लिए “टेलर-मेड” (खास तौर पर तैयार) की गई हैं।

₹2 करोड़ के काम के लिए ₹75 करोड़ का टर्नओवर: एक तर्कहीन शर्त?

इस निविदा की सबसे चौंकाने वाली शर्त वित्तीय पात्रता को लेकर है:

गणित का खेल: 21 सुरक्षाकर्मियों (14 पुरुष, 3 महिला, 1 गनमैन और 3 सुपरवाइजर) के लिए निविदा का वार्षिक मूल्य लगभग ₹60 लाख (3 साल के लिए ₹1.80 करोड़) है।

अजीब मांग: इतने छोटे काम के लिए न्यूनतम ₹75 करोड़ का टर्नओवर मांगा गया है। इतना ही नहीं, तकनीकी बिड में पूरे अंक पाने के लिए एजेंसी का टर्नओवर ₹375 करोड़ होना चाहिए।

आरोप: “₹2 करोड़ के काम के लिए ₹375 करोड़ का टर्नओवर मांगना न केवल अतार्किक है, बल्कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के दिशा-निर्देशों का भी उल्लंघन है।”

अंकों के वितरण (Scoring System) में विसंगतियां

निविदा के ‘Annexure – B’ में अंकों का जो गणित दिखाया गया है, वह भी संदेह पैदा करता है:

प्रशिक्षण केंद्रों का मोह: मात्र 21 गार्डों की जरूरत के लिए 5 प्रशिक्षण केंद्रों पर 10 अंक दिए जा रहे हैं, जबकि 1 केंद्र ही पर्याप्त होता है।

अनुभव की सीमा: अनुभव के लिए अधिकतम 10 अंक तय हैं, लेकिन उप-बिंदुओं में 5 कार्यों के लिए 15 अंक आवंटित किए गए हैं, जो गणितीय रूप से भी गलत और विरोधाभासी है।

संस्थान की मर्यादा पर दाग
एक ऐसा संस्थान जहाँ भविष्य के न्यायाधीश और वकील तैयार होते हैं, वहाँ निविदा प्रक्रिया में ऐसी “प्रशासनिक अनियमितता” संस्थान की मान-मर्यादा को धूमिल कर रही है। निविदादाताओं ने मांग की है कि इस निविदा को तत्काल रद्द कर पुनः निविदा (Re-tender) निकाली जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे और सभी को समान अवसर मिल सके।

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