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दावोस में झारखण्ड ने ऊर्जा के उत्पादन, उपभोग और सतत विकास पर वैश्विक साझेदारी को दिया नया

दावोस/रांची: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक के दूसरे दिन झारखण्ड ने ऊर्जा के उत्पादन, उपभोग और सतत विकास और क्षेत्रीय नेतृत्व से जुड़े वैश्विक संवादों में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय नीति निर्माताओं, निवेशकों और वैश्विक संगठनों के साथ कई महत्वपूर्ण चर्चाओं में भाग लिया।

सतत और समावेशी आर्थिक विकास के लिए वैश्विक सहयोग ढांचे को सुदृढ़ करने पर रहा जोर

मुख्यमंत्री का इंटर-मिनिस्टीरियल डायलॉग में संबोधन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। इस सत्र में स्लोवाकिया के पूर्व वित्त एवं अर्थव्यवस्था मंत्री वाजिल हुडाक सहित अनेक वैश्विक नेताओं ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य विषय सतत और समावेशी आर्थिक विकास के लिए वैश्विक सहयोग ढांचे को सुदृढ़ करना रहा। संवाद के दौरान नवीकरणीय ऊर्जा, भारी वाहन निर्माण में निवेश की संभावनाओं और बागवानी क्षेत्र में टिकाऊ पद्धतियों को अपनाने जैसे विषयों पर भी गहन विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री ने “कैपिटल इन एक्शन: स्केलिंग एनर्जी सिस्टम्स थ्रू पॉलिसी, फाइनेंस एंड रीजनल लीडरशिप” विषयक चर्चा में भी भाग लिया। इस चर्चा में स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों के विस्तार, नवाचार आधारित वित्तपोषण और प्रभावी नीतिगत समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

राज्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि वैश्विक स्तर पर तय जलवायु और स्थिरता लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर लागू करने में राज्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने झारखंड द्वारा औद्योगिक विकास को पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ संतुलित करने, रोजगार सृजन को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय आर्थिक मजबूती को सुदृढ़ करने के प्रयासों को प्रमुखता से रेखांकित किया।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दूसरे दिन झारखण्ड की यह सक्रिय भागीदारी राज्य की स्वच्छ ऊर्जा, सतत औद्योगिकीकरण और समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। वैश्विक मंचों पर निरंतर संवाद और साझेदारी के माध्यम से झारखण्ड भविष्य-उन्मुख, संतुलित और टिकाऊ विकास की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

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