PESA नियमावली 2025 लागू करने पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह को बधाई: आलोक कुमार दुबे
रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दुबे ने कहा कि झारखंड सरकार द्वारा Panchayats (Extension to the Scheduled Areas) Act, 1996 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु PESA नियमावली 2025 को अधिसूचित करना राज्य के आदिवासी एवं अनुसूचित क्षेत्रों के लिए एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह को बधाई दी।
आलोक कुमार दुबे ने कहा कि PESA Act, 1996 संसद द्वारा पारित होने के बावजूद झारखंड में वर्षों तक स्पष्ट नियमों के अभाव में व्यवहार में लागू नहीं हो सका। महागठबंधन सरकार ने PESA नियमावली 2025 अधिसूचित कर उस प्रशासनिक शून्य को समाप्त किया है, जिसकी वजह से ग्राम सभा आधारित शासन व्यवस्था अब तक पूरी तरह संस्थागत नहीं हो पाई थी।
उन्होंने कहा कि PESA नियमावली 2025 के माध्यम से ग्राम सभा की संरचना, बैठक की प्रक्रिया, कोरम, निर्णय-प्रणाली और प्रशासनिक समन्वय को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इससे ग्राम सभा को औपचारिक मान्यता मिली है और स्थानीय शासन में उसकी भूमिका को एक व्यवस्थित ढांचा प्राप्त हुआ है। नियमावली में ग्राम सभा को विकास योजनाओं, सामाजिक विषयों और स्थानीय स्तर के कार्यों से जोड़ने की स्पष्ट व्यवस्था की गई है।
आलोक कुमार दुबे ने कहा कि नियमावली का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इसमें परंपरागत ग्राम संस्थाओं और पंचायती राज व्यवस्था के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया गया है। इससे आदिवासी समाज की परंपरा और संवैधानिक ढांचे के बीच संतुलन बनेगा और स्थानीय स्वशासन की भावना को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि PESA नियमावली 2025 के तहत प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता पर विशेष बल दिया गया है। अधिकारियों की भूमिका, प्रक्रिया और जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय की गई हैं, जिससे निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और मनमानी की संभावना कम होगी। विकास योजनाओं के अनुमोदन और क्रियान्वयन में ग्राम सभा की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक ठोस कदम है।
विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए आलोक कुमार दुबे ने कहा कि PESA नियमावली को लेकर अनावश्यक भ्रम फैलाया जा रहा है। सच्चाई यह है कि बिना नियमावली के PESA कानून केवल कागज़ों तक सीमित था। महागठबंधन सरकार ने संवैधानिक दायित्व निभाते हुए उसे लागू करने की स्पष्ट और व्यवहारिक प्रक्रिया तैयार की है। यह नियमावली किसी अधिकार को समाप्त करने का नहीं, बल्कि ग्राम सभा आधारित शासन को व्यवस्थित और प्रभावी बनाने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि सरकार का यह स्पष्ट दृष्टिकोण है कि PESA नियमावली 2025 एक शुरुआत है। इसके क्रियान्वयन के दौरान प्राप्त अनुभवों और जनसंवाद के आधार पर आवश्यक सुधार किए जा सकते हैं। उद्देश्य आदिवासी स्वशासन को कमजोर करना नहीं, बल्कि उसे प्रशासनिक स्पष्टता और संस्थागत समर्थन प्रदान करना है।
अंत में आलोक कुमार दुबे ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और महागठबंधन सरकार आदिवासी अधिकारों, स्थानीय स्वशासन और संविधान की भावना के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। PESA नियमावली 2025 इसी प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जो आने वाले समय में झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों के विकास और सशक्तिकरण में निर्णायक भूमिका निभाएगी।