रांची: झारखंडी भाषाओं को उनका उचित सम्मान और अधिकार दिलाने तथा राज्य की समृद्ध भाषाई एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और विकास के उद्देश्य से मंगलवार को राजधानी रांची में एक विशाल पदयात्रा निकाली गई।
पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के नेतृत्व और प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश की उपस्थिति में यह पदयात्रा मोरहाबादी मैदान से शुरू हुई। पदयात्रा में बड़ी संख्या में स्कूली व कॉलेज के विद्यार्थियों ने पारंपरिक वेशभूषा, मांदर-नगाड़ा और झारखंडी संस्कृति के प्रतीकों के साथ उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे रास्ते “झारखंड की भाषा, झारखंड की पहचान” और “भाषाओं का सम्मान, हमारी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान” के नारे गूंजते रहे।
यह पदयात्रा मोरहाबादी से होते हुए कोकर स्थित धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के समाधि स्थल पर जाकर संपन्न हुई। वहां प्रतिभागियों ने बिरसा मुंडा को नमन कर भाषाओं के संरक्षण का संकल्प लिया।
आयोजकों ने कहा कि झारखंडी भाषाओं – नागपुरी, कुड़ुख, मुंडारी, हो, संथाली, खड़िया सहित अन्य को संवैधानिक एवं संस्थागत सम्मान मिलना चाहिए। इसके लिए एक सशक्त, स्वायत्त और संसाधन-संपन्न झारखंडी भाषा अकादमी की स्थापना जरूरी है, जो इन भाषाओं के संरक्षण, शोध और आने वाली पीढ़ियों तक इस विरासत को पहुंचाने का काम कर सके।