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केन्दुआ पंचायत में विकास के नाम पर सिर्फ आश्वासन, 8 बुनियादी सुविधाओं से आज भी वंचित हैं ग्रामीण

बिरनी (गिरिडीह): कहते हैं विकास गांव से शुरू होता है, लेकिन बिरनी प्रखंड की केन्दुआ पंचायत आज भी विकास की बाट जोह रही है। लगभग 8000 की आबादी वाली इस पंचायत में आज भी वो 8 बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, जो हर पंचायत में होनी चाहिए। इसी को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और ग्रामीणों ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री, गिरिडीह सांसद और बगोदर विधायक को 8 सूत्री मांग पत्र सौंपा है।

सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत मुख्यालय से 10 किलोमीटर अंदर होने के कारण यहां स्वास्थ्य सुविधा सबसे बड़ी समस्या है। रात में अगर कोई बीमार पड़ जाए या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना पड़े तो एम्बुलेंस नहीं मिलती। प्राइवेट वाहन वाले 2500 से 3000 रुपये वसूलते हैं, जो गरीब परिवार दे नहीं पाता। कई बार मरीजों की रास्ते में ही मौत हो जाती है। इसलिए पंचायत में एक सरकारी एम्बुलेंस की मांग सबसे पहली है।

दूसरी बड़ी समस्या शिक्षा को लेकर है। पंचायत में सैकड़ों छात्र-छात्राएं मैट्रिक, इंटर, JSSC, SSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन उनके लिए एक भी पुस्तकालय नहीं है। बच्चों को 15 किलोमीटर दूर बिरनी या गिरिडीह जाना पड़ता है। ग्रामीणों की मांग है कि पंचायत भवन में ही एक पुस्तकालय खोला जाए जिसमें किताबें, बैठने की व्यवस्था और इंटरनेट की सुविधा हो।

तीसरी और चौथी मांग सुरक्षा से जुड़ी है। गांव की सभी सड़कों और गलियों में स्ट्रीट लाइट नहीं है। शाम ढलते ही पूरे गांव में अंधेरा छा जाता है। महिलाओं और छात्राओं को घर से निकलने में डर लगता है। चोरी की घटनाएं भी बढ़ी हैं। साथ ही मुख्य चौक, बाजार, स्कूल और पंचायत भवन पर एक भी CCTV कैमरा नहीं है, जिससे असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हैं। ग्रामीणों ने सभी सड़कों पर स्ट्रीट लाइट और प्रमुख स्थानों पर CCTV लगाने की मांग की है।

पांचवीं मांग साफ-सफाई की है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में महीनों तक साफ-सफाई नहीं होती। नालियां जाम हैं, जगह-जगह कचरे का ढेर लगा है, जिससे मच्छर पनप रहे हैं और मलेरिया, डेंगू जैसी बीमारियां फैल रही हैं। ग्रामीणों ने हर महीने सफाई का रोस्टर और स्थायी सफाई कर्मी की नियुक्ति की मांग की है।

छठी मांग सार्वजनिक शौचालय की है। बाजार और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं होने से महिलाओं और राहगीरों को भारी परेशानी होती है।

सातवीं मांग गरीब बच्चों के भविष्य से जुड़ी है। गरीबी के कारण कई बच्चे महंगी कोचिंग नहीं कर पाते। ग्रामीणों ने पंचायत भवन में ही निःशुल्क कोचिंग सेंटर खोलने की मांग की है, ताकि गरीब बच्चे भी पढ़कर आगे बढ़ सकें।

आठवीं और अंतिम मांग पर्यावरण को लेकर है। ग्रामीण हर साल बरसात में 1000 पौधा लगाने और उसकी घेराबंदी कर सुरक्षा करने का संकल्प लेना चाहते हैं, ताकि गांव हरा-भरा रहे।

ग्रामीणों ने कहा कि अगर जल्द उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे प्रखंड से लेकर जिला मुख्यालय तक आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

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