JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने के बाद नया बखेड़ा: सफल अभ्यर्थियों ने खोला हेमंत सरकार के खिलाफ मोर्चा, रांची में भारी विरोध प्रदर्शन
रांची: झारखंड में पिछले 24 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन के आगे झुकते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार देर रात जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) परीक्षा और साल 2014 से आउटसोर्सिंग कंपनी टीडीपीएल (TDPL) द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की ऐतिहासिक घोषणा की। सरकार के इस फैसले से जहां एक तरफ धांधली का आरोप लगाकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के एक गुट ने जश्न मनाया, वहीं दूसरी तरफ इस परीक्षा को पास कर चुके सफल उम्मीदवार गहरे सदमे और आक्रोश में हैं।
इस फैसले के तुरंत बाद, जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में क्वालिफाई कर चुके सैकड़ों अभ्यर्थियों ने रांची में प्रोजेक्ट भवन (सचिवालय) के बाहर एकजुट होकर हेमंत सरकार के खिलाफ कड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।”एक पल में हम बेरोजगार हो गए”विरोध प्रदर्शन कर रहे सफल अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की कड़ी मेहनत और ईमानदारी के दम पर यह परीक्षा पास की थी। इनमें से कई अभ्यर्थी तो ऐसे हैं जिन्होंने दिसंबर 2025 के बाद विभिन्न सरकारी विभागों (जैसे गृह, वित्त, सड़क परिवहन और श्रम विभाग) में योगदान भी दे दिया था।
अभ्यर्थियों ने रोते और बिलखते हुए कहा, “सरकार के एक फैसले ने हमें एक झटके में सड़क पर ला खड़ा किया है। हमारी क्या गलती है? अगर परीक्षा प्रणाली में कोई खामी थी या किसी व्यक्ति विशेष पर धांधली के आरोप थे, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए थी, न कि पूरी परीक्षा को ही रद्द कर दिया जाना चाहिए था।”मानव श्रृंखला बनाकर जताया विरोध, कोर्ट जाने की तैयारीसफल अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन के सामने एक बड़ी मानव श्रृंखला बनाई और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की।
आंदोलनकारियों का कहना है कि यह नियुक्तियां अदालत के आदेशों और पूरी न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद की गई थीं। अभ्यर्थियों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य में ‘भीड़ तंत्र’ की जीत हुई है और योग्यता की हार हुई है। उन्होंने बैनर और पोस्टरों के साथ नारेबाजी करते हुए मांग की है कि सरकार इस फैसले को तुरंत वापस ले, अन्यथा वे अपने न्याय और हक के लिए एक बार फिर झारखंड उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।जांच की मांग पर अड़े अभ्यर्थीसफल उम्मीदवारों का स्पष्ट कहना है कि वे किसी भी स्तर की जांच (चाहे वह सीबीआई जांच हो या सीआईडी जांच) का सामना करने के लिए तैयार हैं।
यदि जांच में कोई अभ्यर्थी दोषी पाया जाता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई हो, लेकिन बिना किसी पुख्ता सबूत के 2,000 से अधिक सफल युवाओं का भविष्य अंधकार में डालना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। फिलहाल, रांची में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और सफल अभ्यर्थियों का यह नया आंदोलन हेमंत सरकार के लिए एक और बड़ी मुसीबत बनता दिख रहा है।