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विधायकों को हुआ ‘तनाव’, रांची के फाइव-स्टार होटलों में ‘अटूट लोकतंत्र’ और स्पा थेरेपी शुरू!

रांची — भारतीय मौसम विभाग भले ही झारखंड में मानसून के देरी से आने की भविष्यवाणी कर रहा हो, लेकिन राज्य के आलीशान होटलों के मालिकों के चेहरों पर अभी से रौनक छा गई है। दरअसल, राज्य में हर दो साल में आने वाले और बेहद लोकप्रिय ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स सीजन’ की धमाकेदार शुरुआत हो चुकी है!

राज्य की दो राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले मतदान के नजदीक आते ही, सभी राजनीतिक दलों को अचानक अपने विधायकों को ‘गहन आध्यात्मिक शांति’, ‘प्रीमियम स्पा थेरेपी’ और ‘हाई-सिक्योरिटी कॉन्टिनेंटल बुफे’ देने की एक बेहद जरूरी और अटूट आवश्यकता महसूस होने लगी है।

फाइव-स्टार रिजॉर्ट्स में ‘विधायक दर्शन’

इस डर से कि कहीं उनके प्यारे विधायकों को अचानक मतदान के दिन ‘शॉर्ट-टर्म मेमोरी लॉस’ न हो जाए या उनका हाथ गलती से किसी गलत उम्मीदवार के नाम पर न चल जाए, भाजपा (BJP) के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन ने तुरंत पुख्ता इंतजाम कर दिए हैं । अपनी “गठबंधन की एकता” को अटूट बनाए रखने के लिए, उन्होंने अपने सभी माननीय विधायकों को रांची के एक चमचमाते फाइव-स्टार होटल में सुरक्षित शिफ्ट कर दिया है।

एक पार्टी कोऑर्डिनेटर ने बायोमेट्रिक अटेंडेंस शीट चेक करते हुए दबी आवाज में कहा, “देखिए, इसका अविश्वास से कोई लेना-देना नहीं है । हमें बस ऐसा लगा कि हमारे विधायक जनता की सेवा करते-करते काफी तनाव में आ गए हैं। अब राज्यसभा में बैलेट पेपर पर एक साधारण सा निशान लगाने जैसी भारी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी को निभाने के लिए ४८ घंटे का अनिवार्य योग, सख्त रूम सर्विस और बिना इंटरनेट का माहौल तो चाहिए ही न?”

इस आलीशान होटल ‘लॉकडाउन’ की अहमियत तब और बढ़ गई जब शुरुआत में एनडीए के ७ विधायकों के फोन का जीपीएस (GPS) अचानक खराब हो गया और वे उस जरूरी बैठक में नहीं पहुंच पाए, जहां भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी उनका बेसब्री से इंतजार कर रहे थे । हालांकि, पार्टी के बड़े नेताओं ने इस बात को हवा में उड़ाते हुए कहा कि विधायकों ने अपनी अनुपस्थिति की सूचना पहले ही ‘टेलीपैथी’ (दूरसंचार की एक विशेष मानसिक तकनीक) के जरिए भेज दी थी ।

‘अंतरात्मा की आवाज’ का गणित

इस बार असली रोमांच दूसरी राज्यसभा सीट को लेकर है । हालांकि सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) को पूरा भरोसा है कि उनके उम्मीदवार बैद्यनाथ राम आसानी से चुनाव जीत जाएंगे, लेकिन बचे हुए सरप्लस (अतिरिक्त) वोटों ने इस चुनाव को गणित के किसी उलझे हुए सवाल जैसा बना दिया है ।

विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने इस चुनावी जंग में एक गहरा दार्शनिक मोड़ ला दिया है । उन्होंने सभी को याद दिलाया कि चूंकि राज्यसभा का चुनाव पूरी तरह से गुप्त और पार्टी व्हिप के कानूनी दायरे से बाहर होता है, इसलिए विधायकों पर कोई दबाव नहीं है।

मरांडी जी ने एक बेहद उम्मीद भरी मुस्कान के साथ कहा, “हमें पूरा विश्वास है कि सभी दलों के विधायक अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनेंगे और उसी के अनुसार वोट करेंगे।” राजनीतिक पंडितों ने तुरंत इस ‘अंतरात्मा की आवाज’ का अनुवाद किया—”जिस उम्मीदवार के तर्क (और साधन) सबसे ज्यादा असरदार होंगे, वोट उसी को जाएगा।”

मॉक पोल और इंक (स्याही) की ट्रेनिंग

इधर आतिथ्य सत्कार और रणनीतिक सावधानी के मामले में सत्ताधारी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन भी पीछे रहने वाला नहीं था । मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सरकारी आवास पर गठबंधन (JMM, कांग्रेस, RJD और भाकपा-माले) के नेताओं की एक हाई-लेवल बैठक बुलाई गई । ८१ सदस्यों वाली विधानसभा में ५६ विधायकों के साथ यह गठबंधन तकनीकी रूप से दोनों सीटें जीतने का दम रखता है ।

लेकिन, रिस्क न लेते हुए और यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई विधायक गलती से किसी दूसरे ग्रह के उम्मीदवार को वोट न दे दे, देर रात एक ‘मॉक पोल’ (नकली मतदान) का आयोजन किया गया।

एक कांग्रेस नेता ने चुनाव पर्यवेक्षकों भूपेश बघेल और अजय शर्मा की मौजूदगी में समझाया, “हम बस यह पक्का करना चाहते हैं कि हमारे विधायकों को अच्छी तरह पता हो कि स्याही और पेन का इस्तेमाल कैसे किया जाता है। लोकतंत्र बहुत नाजुक है। अगर कोई विधायक बैलेट पेपर का फॉन्ट देखकर भ्रमित हो गया और उसने हमारे उम्मीदवार प्रणव झा की जगह किसी बड़े कॉर्पोरेट दिग्गज को चुन लिया, तो यह हमारी सामूहिक अंतरात्मा के लिए बड़ा झटका होगा!”

‘सबके पीछे केंद्रीय एजेंसियां लगा दो’

चुनाव से ठीक पहले के पारंपरिक रिवाज को निभाते हुए जेएमएम (JMM) ने चुनाव आयोग को एक बेहद जरूरी और भावुक पत्र लिखा है। पार्टी ने मांग की है कि सीबीआई, ईडी, डीआरआई और सीवीसी जैसी तमाम केंद्रीय एजेंसियां मतदान केंद्र के बाहर ही अपना परमानेंट तंबू गाड़कर बैठ जाएं।

सत्ताधारी गठबंधन का तर्क है कि विपक्ष के पास जरूरी नंबर न होने के बावजूद उनका यह ‘अति-आत्मविश्वास’ साफ इशारा करता है कि पर्दे के पीछे कुछ बड़ा पक रहा है।

इस बीच, रांची की सड़कों पर आम जनता इन फाइव-स्टार होटलों के बाहर खड़ी चमचमाती गाड़ियों के काफिले को बड़े चाव से देख रही है।

रांची विधानसभा के बाहर एक ऑटो ड्राइवर ने मुस्कुराते हुए कहा, “यह नजारा वाकई खूबसूरत है। हम उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान के लिए चुनते हैं, और बदले में वे हमारे लोकतंत्र को बचाने के लिए फाइव-स्टार होटल में शानदार बुफे का आनंद लेते हैं। यही तो उच्च सदन का असली जादू है!”

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