RANCHI: झारखंड सरकार के खाद्य सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग में एक बड़े टेंडर घोटाले की बू आ रही है. झारखंड राज्य खाद्य आपूर्ति निगम लिमिटेड (JSF&CSC) द्वारा जारी 44.5 करोड़ रुपये के मैनपावर आउटसोर्सिंग टेंडर (GEM/2026/B/7661161) को लेकर विवाद खड़ा हो गया है.
नोर्ना सोफ्टेक प्राइवेट लिमिटेड ने सीधे राज्य के मुख्य सचिव और निगम की प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर टेंडर में भारी धांधली और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं. शिकायत के अनुसार, टेंडर की शर्तों को इस तरह तैयार किया गया है जिससे किसी एक ‘खास पसंदीदा’ एजेंसी को फायदा पहुंचाया जा सके और अन्य सभी कंपनियों को रेस से बाहर किया जा सके.
कैबिनेट के नियमों और CVC गाइडलाइंस की सरेआम धज्जियां उड़ीं
शिकायतकर्ता कंपनी का दावा है कि इस टेंडर में केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के निष्पक्षता नियमों की पूरी तरह अवहेलना की गई है. चौंकाने वाली बात यह है कि झारखंड मंत्रिमंडल (कैबिनेट) द्वारा स्वीकृत आउटसोर्सिंग नियमावली (SOP दिनांक 03/06/2025) के मूल सिद्धांतों को भी पलट दिया गया है. राज्य सरकार की एसओपी का मकसद अधिक से अधिक स्थानीय और योग्य संवेदकों को मौका देना था, लेकिन निगम के अधिकारियों ने इसके ठीक विपरीत काम किया है.
शर्तों का ऐसा मायाजाल, जहां छोटे उद्यमी पहले ही दौर में बाहर
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, 699 कर्मियों की आपूर्ति के लिए 3 साल का यह ठेका निकाला गया है. लेकिन इसमें तकनीकी मूल्यांकन (Technical Evaluation) के अंक देने के लिए ऐसे नियम बनाए गए हैं, जिन्हें पूरा करना सामान्य कंपनियों के लिए नामुमकिन है:
* 80% का कड़ा कट-ऑफ: तकनीकी दौर में न्यूनतम 80% अंक लाने वाली कंपनी ही वित्तीय बोली (Financial Bid) के लिए योग्य मानी जाएगी .
* टर्नओवर और नेटवर्थ का दबाव: पिछले वर्षों में न्यूनतम 15 करोड़ के काम का अनुभव और 31 मार्च 2025 तक कम से कम
5 करोड़ की नेटवर्थ अनिवार्य है, इससे कम होने पर सीधे ‘शून्य’ (0) अंक मिलेंगे.
* कर्मचारियों की संख्या पर भेदभाव: जिन कंपनियों के पास पहले से 1500 से कम कर्मचारी हैं उन्हें 0 अंक और 3000 से ऊपर वालों को पूरे 20 अंक देकर सीधे फायदा पहुंचाया जा रहा है
* टाई होने पर जेम नियमों का उल्लंघन: दो कंपनियों के अंक बराबर होने पर काम बांटने का आधार जेम (GeM) के रैंडम एल्गोरिदम को न बनाकर, सबसे अधिक टर्नओवर वाली कंपनी को चुना जाएगा
रद्द हो सकता है टेंडर, सुधार की मांग तेज़
जेम पोर्टल की आधिकारिक गाइडलाइंस के मुताबिक, यदि खरीदार द्वारा जोड़ी गई अतिरिक्त शर्तें मूल नियमों के खिलाफ पाई जाती हैं, तो टेंडर को तत्काल ‘शून्य और अमान्य’ घोषित किया जा सकता है . निजी क्षेत्र और स्थानीय संवेदकों ने सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच कराई जाए और टेंडर में तुरंत शुद्धि-पत्र जारी कर विसंगतियों को दूर किया जाए. 4 जुलाई 2026 को टेंडर बंद होने की आखिरी तारीख है, ऐसे में देखना होगा कि मुख्य सचिव इस पर क्या एक्शन लेते हैं