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बीआईटी मेसरा में एआई-हाइडा 2026 का सफल समापन; 90 से अधिक प्रतिभागियों ने प्राप्त किया कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा विश्लेषण का प्रशिक्षण

रांची: बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी), मेसरा के मात्रात्मक अर्थशास्त्र एवं डेटा विज्ञान विभाग (QEDS) द्वारा आयोजित एक सप्ताहीय संकाय विकास कार्यक्रम “हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा विश्लेषण हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI-HYDA 2026)” का सफल समापन हुआ। यह कार्यक्रम ई एंड आईसीटी अकादमी, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) पटना के सहयोग से तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित किया गया। माननीय कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के विभिन्न संस्थानों से 90 से अधिक संकाय सदस्यों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं एवं शोधार्थियों ने भाग लिया।

उद्घाटन सत्र के पश्चात कार्यक्रम में विशेषज्ञ व्याख्यानों एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्रों की श्रृंखला आयोजित की गई, जिनका उद्देश्य प्रतिभागियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग, दूरसंवेदी प्रौद्योगिकी एवं भू-स्थानिक विश्लेषण के नवीनतम आयामों से परिचित कराना था।

कार्यक्रम के दूसरे दिन बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के डॉ. अमित कुमार तिवारी ने प्रतिभागियों को हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा डाउनलोड करने हेतु उपलब्ध विभिन्न निःशुल्क पोर्टलों की जानकारी देते हुए डेटा पूर्व-प्रसंस्करण एवं इमेज वर्गीकरण तकनीकों का प्रशिक्षण प्रदान किया। उत्तर-पूर्वी अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (NESAC), अंतरिक्ष विभाग, भारत सरकार के वैज्ञानिक/अभियंता श्री निलय निशांत ने “स्मार्ट गवर्नेंस के लिए जियोएआई” विषय पर व्याख्यान देते हुए हैज़र्ड मैपिंग, आपदा प्रबंधन एवं प्राकृतिक संसाधन निगरानी में जियोएआई की भूमिका पर प्रकाश डाला।

बीआईटी मेसरा के डॉ. वी. एस. राठौर ने हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग की मूलभूत अवधारणाओं तथा उपग्रह डेटा पूर्व-प्रसंस्करण तकनीकों की जानकारी दी। कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग, बीआईटी मेसरा के प्रो. अभिजीत मुस्ताफी ने PCA, ICA एवं t-SNE जैसी डायमेंशनलिटी रिडक्शन तकनीकों पर व्याख्यान दिया, जबकि डॉ. के. के. सेनापति ने फीचर इंजीनियरिंग, फीचर एक्सट्रैक्शन एवं फीचर चयन तकनीकों की विस्तृत चर्चा की। इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट (IRRI) के डॉ. विकास दुगेसर ने स्पेक्ट्रोरैडियोमीटर के संचालन एवं हाइपरस्पेक्ट्रल लाइब्रेरी निर्माण का प्रदर्शन किया। इसके उपरांत श्री नीरज कुमार मौर्य, शोधार्थी, QEDS, बीआईटी मेसरा ने पायथन आधारित हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा विश्लेषण पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया।

तीसरे दिन मशीन लर्निंग आधारित तकनीकों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। डॉ. रत्नेश मिश्रा ने सपोर्ट वेक्टर मशीन (SVM), डॉ. आकृति निगम ने रैंडम फॉरेस्ट एवं k-NN एल्गोरिद्म तथा एनआईटी पटना के प्रो. महेश्वरी प्रसाद सिंह ने क्लस्टरिंग तकनीकों पर व्याख्यान दिया। डॉ. मनीष कुमार पांडेय ने मॉडल मूल्यांकन एवं वर्गीकरण मेट्रिक्स पर सत्र संचालित किया। व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्रों में अनिर्बाण दास एवं अभय कुमार ने मशीन लर्निंग मॉडल कार्यान्वयन एवं प्रदर्शन मूल्यांकन का प्रशिक्षण दिया।

चौथे दिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं डीप लर्निंग आधारित उन्नत तकनीकों पर चर्चा की गई। आईआईटी पटना के प्रो. एवं विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव मिश्रा ने विज़न ट्रांसफॉर्मर्स पर व्याख्यान दिया। बीआईटी मेसरा की डॉ. कंचन झा ने ट्रांसफर लर्निंग की अवधारणाओं को समझाया, जबकि डॉ. गणेश खडांगा ने भूमि अभिलेख प्रबंधन एवं भूमि पार्सल पहचान में एआई एवं रिट्रीवल ऑगमेंटेड जनरेशन (RAG) के उपयोग पर प्रकाश डाला। व्यावहारिक सत्रों में सीएनएन, ऑटोएन्कोडर, एक्सप्लेनेबल एआई तथा ट्रांसफर लर्निंग पर प्रशिक्षण दिया गया।

अंतिम दिवस पर आईसीएआर रिसर्च कॉम्प्लेक्स फॉर ईस्टर्न रीजन, पटना के निदेशक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने कृषि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुप्रयोगों पर व्याख्यान दिया। आईसीएआर–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आर. एन. साहू ने “इंटेलिजेंट स्पेक्ट्रोस्कोपी” विषय पर व्याख्यान देते हुए स्पेक्ट्रोस्कोपी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के एकीकृत उपयोग की संभावनाओं को रेखांकित किया। इन्फोसिस फिनैकल के ग्लोबल अलायंसेज़ लीडर रणविजय पांडेय ने एआई-सक्षम भू-स्थानिक विश्लेषण की भावी दिशाओं एवं वैश्विक चुनौतियों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। डॉ. विकास दुगेसर ने पाठ्यक्रम एकीकरण एवं परियोजना नियोजन पर सत्र संचालित किया। दोपहर के सत्र में नीरज कुमार मौर्य के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने मिनी-प्रोजेक्ट विकास गतिविधियों में भाग लिया। इसके पश्चात डॉ. मनीष कुमार पांडेय ने “AI for HYDA” विषय पर विशेष व्याख्यान दिया, जिसमें उन्होंने मशीन लर्निंग, कंप्यूटर विज़न, रोबोटिक्स, नॉलेज रिप्रेज़ेंटेशन, ऑगमेंटेड रियलिटी तथा नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के व्यापक आयामों के रूप में प्रस्तुत करते हुए हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा विश्लेषण में इनके उपयोग की संभावनाओं को रेखांकित किया।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. आर. एन. साहू ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए तथा कार्यक्रम की सफलता पर उन्हें बधाई दी। उन्होंने अपने संबोधन में वैज्ञानिक अनुसंधान, कृषि नवाचार एवं पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों की बढ़ती भूमिका पर बल दिया। समापन समारोह में कार्यक्रम समन्वयक डॉ. मनीष कुमार पांडेय, सह-समन्वयकगण तथा आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का समापन डॉ. मनीष कुमार पांडेय द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी संसाधन व्यक्तियों, प्रतिभागियों, संस्थान प्रशासन, संकाय सदस्यों, शोधार्थियों, तकनीकी कर्मचारियों तथा गैर-शिक्षण कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जियोएआई, हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा विज्ञान, दूरसंवेदी प्रौद्योगिकी तथा सतत विकास पर केंद्रित एआई-हाइडा 2026 ज्ञान-विनिमय, क्षमता निर्माण एवं नवाचार को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुआ। इस कार्यक्रम ने प्रतिभागियों की तकनीकी दक्षता को सुदृढ़ करने के साथ-साथ डेटा विज्ञान, भू-स्थानिक विश्लेषण एवं पर्यावरणीय अनुसंधान के क्षेत्र में नए सहयोग और नवाचार की संभावनाओं को भी प्रोत्साहित किया।

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