पटना: पटना की एक सत्र अदालत (Sessions Court) ने मशहूर शिक्षक खान सर उर्फ फैजल खान को उनके कोचिंग संस्थान के पास हुई फायरिंग की घटना के सिलसिले में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दे दी है।
अग्रिम जमानत याचिका संख्या 2461/2026 पर सुनवाई करते हुए, सत्र न्यायाधीश रूपेश देव ने पुलिस को मामले की केस डायरी और आरोपी का आपराधिक इतिहास अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला कदमकुआं थाना कांड संख्या 418/2026 से जुड़ा है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 109 और आर्म्स एक्ट की धारा 25(9), 27 और 35 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
अभियोजन पक्ष (Prosecution) के अनुसार, 2 जून 2026 को ‘खान जीएस एकेडमी’ के बाहर कुछ लोगों के बीच झड़प हो गई थी। आरोप है कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए खान सर और उनके एक साथी के कहने पर सुरक्षाकर्मियों ने अपनी .315 बोर की लाइसेंसी राइफलों से हवा में दो-दो राउंड फायरिंग की। इस घटना से सार्वजनिक स्थान पर दहशत फैल गई। पुलिस ने दोनों सुरक्षा गार्डों (प्रदीप कुमार और तालेबार सिंह) को गिरफ्तार कर उनके हथियार जब्त कर लिए थे।
अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें
खान सर के वकील ने अदालत में दलील दी कि उकसाने के आरोप पूरी तरह निराधार हैं और यह केवल सह-आरोपियों के बयानों पर आधारित हैं, जो कानूनन सबूत के तौर पर मान्य नहीं हैं। बचाव पक्ष ने कहा:
* एक अन्य सुरक्षा गार्ड पर भीड़ के हमले के बाद, छात्रों की सुरक्षा के लिए आत्मरक्षार्थ (Self-defense) हवा में फायरिंग की गई थी।
* किसी को नुकसान पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था।
* यह पूरा मामला एक अन्य कोचिंग संस्थान के संचालक के साथ व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता (Business Rivalry) के कारण दुर्भावना से प्रेरित है।
* इस्तेमाल किए गए हथियार पूरी तरह लाइसेंसी थे, इसलिए आर्म्स एक्ट की धाराएं लागू नहीं होतीं।
दूसरी ओर, लोक अभियोजक (Public Prosecutor) ने सह-आरोपी के कबूलनामे का हवाला देते हुए खान सर की अग्रिम जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया।
अदालत का आदेश
दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद, अदालत ने खान सर को राहत देते हुए अपने आधिकारिक आदेश में कहा:
“मामले के तथ्यों और परिस्थितियों, याचिकाकर्ता पर लगाए गए आरोपों की प्रकृति और दोनों पक्षों के विद्वान वकीलों द्वारा दी गई दलीलों को ध्यान में रखते हुए; याचिकाकर्ता को कदमकुआं थाना कांड संख्या 418/2026 के संबंध में अगली तारीख तक गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की जाती है। हालांकि, याचिकाकर्ता को जांच अधिकारी (I.O.) को सहयोग करने का निर्देश दिया जाता है और पुलिस द्वारा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उपलब्ध होना होगा।”
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 20 जून 2026 को तय की है।