तमिलनाडु भाजपा में बड़ा फेरबदल: के. अन्नामलाई ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से दिया इस्तीफा, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने किया स्वीकार
नई दिल्ली / चेन्नई: दक्षिण भारत की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर करते हुए, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया है।
पार्टी के केंद्रीय मुख्यालय द्वारा 5 जून 2026 को जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से इस फैसले की घोषणा की गई। भाजपा राष्ट्रीय महासचिव और मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह के हस्ताक्षर वाले इस पत्र में पुष्टि की गई है कि नवनियुक्त भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अन्नामलाई का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, “भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय श्री नितिन नबीन ने तमिलनाडु के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष श्री के. अन्नामलाई द्वारा पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से दिए गए इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है।” यह घटनाक्रम पिछले कुछ दिनों से चल रही राजनीतिक अटकलों के बाद सामने आया है, जब अन्नामलाई ने 2 जून को नई दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व को अपना इस्तीफा सौंपा था।
इस्तीफे के पीछे की बड़ी वजहें
कर्नाटक कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई 2020 में पुलिस सेवा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। उन्हें तमिलनाडु में भाजपा के आक्रामक विस्तार और 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी का वोट शेयर रिकॉर्ड 11.4% तक पहुंचाने का श्रेय दिया जाता है। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनके वैचारिक मतभेद गहरे हो गए थे।
* गठबंधन पर मतभेद: अन्नामलाई राज्य में भाजपा को बिना किसी बैसाखी के स्वतंत्र रूप से खड़ा करना चाहते थे। उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व द्वारा क्षेत्रीय दल एआईएडीएमके (AIADMK) के साथ दोबारा चुनावी गठबंधन करने के फैसले का कड़ा विरोध किया था।
* सीट-बंटवारे का विवाद: 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के दौरान सीट-बंटवारे और टिकट वितरण को लेकर स्थानीय गठबंधन समिति के साथ उनके गंभीर मतभेद रहे।
* पद से हटाया जाना: एआईएडीएमके के साथ गठबंधन की शर्तों के तहत, अन्नामलाई को चुनाव से ठीक पहले प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया था और उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए उनकी पसंदीदा सीट (सिंगानल्लूर) भी नहीं दी गई थी। चुनाव में इस गठबंधन को मिली भारी हार ने अन्नामलाई के रुख को सही साबित किया, लेकिन पार्टी के भीतर उनकी राहें जुदा हो गईं।
आगे की राह: ‘तमिल-फर्स्ट’ क्षेत्रीय आंदोलन की तैयारी
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि तेजतर्रार नेता अन्नामलाई अब दिल्ली की राजनीति में जाने या राज्यसभा सीट स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक, वह जमीन पर लौटकर एक स्वतंत्र रास्ता चुन रहे हैं।
वह अपने मौजूदा गैर-लाभकारी संगठन “वी द लीडर्स” (We The Leaders) के माध्यम से तमिलनाडु में एक नए सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत कर सकते हैं। यह मंच आने वाले कुछ महीनों में एक नए क्षेत्रीय राजनीतिक दल का रूप ले सकता है। तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने थलपति विजय की पार्टी (TVK) की हालिया चुनावी सफलता के बाद, अन्नामलाई को लगता है कि राज्य में द्रविड़ दलों के विकल्प के रूप में एक युवा-केंद्रित, नए विकल्प के लिए पूरी जगह खाली है।
अन्नामलाई जल्द ही सोशल मीडिया पर लाइव आकर अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के सामने अपनी आगे की रणनीति का खुलासा करेंगे।