रांची: झारखंड की राजनीति में गठबंधन धर्म की आंतरिक रस्साकशी अब सतह पर आने लगी है। मोरहाबादी स्थित राजकीय अतिथिशाला में शनिवार को हुई झारखंड प्रदेश कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति की उच्च स्तरीय बैठक भले ही आगामी पंचायत चुनाव और एसआईआर (SIR) कार्य पर केंद्रित थी, लेकिन इसके अंतर्निहित राजनीतिक निहितार्थ सीधे तौर पर सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के साथ जारी सीट शेयरिंग के संघर्ष से जुड़े हैं। प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश की अध्यक्षता और केंद्रीय प्रभारी के. राजू की मौजूदगी में हुई इस बैठक ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस अब सूबे में ‘जूनियर पार्टनर’ की भूमिका से बाहर निकलने के लिए छटपटा रही है।
सांगठनिक मजबूती का बहाना या JMM पर दबाव?
बैठक में केंद्रीय प्रभारी के. राजू ने घोषणा की कि जून महीने में प्रखंड अध्यक्षों का प्रमंडलीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस का यह ‘चुनावी शंखनाद’ दरअसल JMM नेतृत्व को अपनी जमीनी ताकत दिखाने की एक सोची-समझी रणनीति है। झारखंड में ओबीसी (OBC) आरक्षण लागू होने के बाद यह पहला पंचायत चुनाव है, और कांग्रेस इस बड़े वोट बैंक के सहारे गठबंधन में अपनी मोलतोल की शक्ति (Bargaining Power) बढ़ाना चाहती है।
‘एक सीट’ के संघर्ष का राजनीतिक तर्क
झारखंड की मौजूदा सियासत में कांग्रेस के इस आक्रामक रुख के पीछे गहरा राजनीतिक तर्क और मजबूरी छिपी है:
* अस्तित्व की लड़ाई: पिछले कुछ चुनावों से JMM राज्य में बड़े भाई की भूमिका में है। कांग्रेस को डर है कि अगर उसने इस बार JMM से अपनी मनमुताबिक सीटें (या विशिष्ट एकल निर्वाचन क्षेत्रों में हिस्सेदारी) नहीं छीनी, तो उसका जनाधार पूरी तरह JMM में शिफ्ट हो सकता है।
* एसआईआर (SIR) और वोटर लिस्ट का दांव: बैठक में एसआईआर और वोटर लिस्ट से योग्य मतदाताओं को जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। इसके पीछे तर्क यह है कि कांग्रेस अपने पारंपरिक और नए ओबीसी मतदाताओं का पंजीकरण मजबूत कर JMM को यह संदेश देना चाहती है कि उसके बिना गठबंधन की नैया पार नहीं हो सकती।
* कार्यकर्ताओं का बढ़ता दबाव: बन्ना गुप्ता, जलेश्वर महतो और रवींद्र सिंह जैसे कद्दावर नेताओं की मौजूदगी में बंद कमरे में हुई यह चर्चा इशारा करती है कि प्रदेश नेतृत्व पर जमीनी कार्यकर्ताओं का भारी दबाव है। कार्यकर्ता JMM के सामने पूरी तरह सरेंडर करने के मूड में नहीं हैं।
जून का सम्मेलन तय करेगा गठबंधन का भविष्य
महासचिव सह मीडिया संयोजक लाल किशोर नाथ शाहदेव द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जून के प्रमंडलीय सम्मेलन में पंचायत चुनाव के साथ-साथ संगठन की ताकत का प्रदर्शन होगा। कांग्रेस इस सम्मेलन के जरिए JMM को यह दिखाना चाहती है कि वह राज्य की हर चौखट पर खड़ी है।
अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली JMM, कांग्रेस के इस ‘शक्ति प्रदर्शन’ और दबाव की राजनीति के आगे झुककर उसे गठबंधन में उसकी मनमुताबिक हिस्सेदारी देती है या कांग्रेस का यह संघर्ष सिर्फ बैठकों तक ही सीमित रह जाता है।