रांची: झारखंड विधानसभा में झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026 पारित हो गया है, जिसके तहत राज्य के विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार अब कुलपतियों का चयन एक विशेष खोज समिति के माध्यम से किया जाएगा।
विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, कुलपति चयन के लिए एक खोज समिति गठित होगी, जिसकी अध्यक्षता कुलाधिपति द्वारा नामित प्रतिष्ठित शिक्षाविद् करेंगे। समिति में राज्य सरकार के प्रतिनिधि, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) का सदस्य तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
समिति तीन से पांच योग्य उम्मीदवारों का पैनल तैयार कर बंद लिफाफे में सौंपेगी। इन नामों को वर्णमाला क्रम में रखा जाएगा और किसी प्रकार की प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। यदि समिति में मतों की समानता होती है, तो अध्यक्ष को निर्णायक मत का अधिकार होगा।
विधेयक के अनुसार कुलाधिपति और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन संयुक्त रूप से इस पैनल में से किसी एक उम्मीदवार का चयन करेंगे, जिसके बाद कुलाधिपति द्वारा औपचारिक नियुक्ति की जाएगी। यदि पैनल से चयन नहीं किया जाता है, तो नई सूची मांगी जा सकती है।
कुलपति नियुक्ति प्रक्रिया पद रिक्त होने से छह माह पूर्व शुरू होगी और एक माह पहले तक पूरी कर ली जाएगी। आवेदक की अधिकतम आयु 65 वर्ष निर्धारित की गई है।
विपक्ष ने जताया विरोध, चर्चा पर उठे सवाल
विधेयक को लेकर विधानसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आए। भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने इसे प्रवर समिति को भेजने की मांग की, लेकिन सरकार ने संशोधनों को खारिज करते हुए विधेयक पारित करा लिया।
बीजेपी विधायक नीरा यादव ने आरोप लगाया कि 135 पन्नों के इस विधेयक पर पर्याप्त चर्चा नहीं कराई गई। वहीं जयराम महतो ने कहा कि यह बिल छात्रों और युवाओं से जुड़ा है, इसलिए इस पर व्यापक बहस होनी चाहिए थी।
क्या बदलेगा?
अब तक कुलपतियों की नियुक्ति मुख्यतः राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में होती थी, लेकिन इस विधेयक के लागू होने के बाद चयन प्रक्रिया में सरकार की भूमिका बढ़ जाएगी। इससे विश्वविद्यालय प्रशासन और शैक्षणिक ढांचे पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।