रांची: बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर चल रहे तीन दिवसीय CBRN (कैमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर) प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 13 मार्च, 2026 को NDRF की टीम द्वारा एक मॉक एक्सरसाइज (युद्धाभ्यास) का आयोजन किया गया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य किसी भी संभावित परमाणु या रासायनिक आपदा की स्थिति में एयरपोर्ट प्रबंधन और अन्य संबंधित एजेंसियों की तैयारी और आपसी समन्वय को मजबूत करना था।
अभ्यास के दौरान एक काल्पनिक आपदा की स्थिति पैदा की गई, जिसमें NDRF के जवानों ने ऐसी परिस्थितियों से निपटने की प्रक्रियाओं का जीवंत प्रदर्शन किया।
अभ्यास की मुख्य विशेषताएं:
साझा अभियान: इस मॉक ड्रिल में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के अधिकारियों के साथ CISF, विभिन्न एयरलाइंस के कर्मियों और अन्य संबंधित सुरक्षा एजेंसियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
सुरक्षा प्रोटोकॉल का प्रदर्शन: कार्यक्रम के दौरान आपदा के समय अपनाए जाने वाले सुरक्षा मानकों, राहत और बचाव कार्यों और विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल के परिचालन ढांचे का अभ्यास किया गया।
त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र: अभ्यास का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी आपात स्थिति में प्रतिक्रिया का समय (Response Time) न्यूनतम हो और जान-माल के नुकसान को रोका जा सके।
एयरपोर्ट प्रबंधन के अनुसार, इस तरह के प्रशिक्षण और अभ्यास से यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी गंभीर खतरे का सामना करने के लिए सुरक्षा तंत्र को ‘अलर्ट’ मोड पर रखने में मदद मिलती है।