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झारखंड के किसानों के लिए नया सवेरा: कांके बेकन फैक्ट्री का होगा कायाकल्प, कृषि और बागवानी के लिए हुए दो बड़े समझौते

राँची: झारखंड के कृषि क्षेत्र और किसानों की तकदीर बदलने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की की उपस्थिति में दो महत्वपूर्ण समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए, जो राज्य के पशुपालन और बागवानी क्षेत्र में आधुनिक क्रांति लाएंगे।

कांके बेकन फैक्ट्री का पुनरुद्धार: अब विश्वस्तरीय होगा मांस प्रसंस्करण

पहला समझौता भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और राष्ट्रीय मांस एवं पोल्ट्री अनुसंधान संस्थान (NMRI), हैदराबाद के साथ हुआ है। इसका मुख्य उद्देश्य राँची के कांके स्थित बेकन फैक्ट्री को पुनर्जीवित करना और राज्य के मांस क्षेत्र का व्यापक विकास करना है।
इस समझौते के तहत बेकन फैक्ट्री के आधुनिकीकरण के लिए तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान की जाएगी। मांस प्रसंस्करण में अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को लागू किया जाएगा। स्थानीय उद्यमियों और श्रमिकों के लिए विशेष तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र खोलने की संभावना तलाशी जाएगी। राज्य भर में वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी।
पशुपालन निदेशक आदित्य कुमार आनंद ने इसे एक क्रांतिकारी कदम बताते हुए कहा कि इससे किसानों, उद्यमियों और उपभोक्ताओं, सभी को सीधा लाभ मिलेगा।

बागवानी में ‘वैल्यू एडिशन’: खेतों से बाजारों तक का सफर

दूसरा महत्वपूर्ण समझौता बागवानी निदेशालय, झारखंड और भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (IIHR), बेंगलुरु के बीच हुआ है। इसका लक्ष्य झारखंड में फल, सब्जी, औषधीय पौधों, मशरूम और फूलों की खेती की उत्पादकता और गुणवत्ता को बढ़ाना है।
इस साझेदारी से किसानों को अपनी फसलों का बेहतर मूल्य मिलेगा। प्रसंस्करण (Processing) क्षेत्र के विकास से न केवल फसल की बर्बादी कम होगी, बल्कि ‘वैल्यू एडिशन’ के जरिए किसानों की आमदनी में भी भारी इजाफा होगा।

मुख्यमंत्री का संकल्प: हर चेहरे पर मुस्कान

इस अवसर पर कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दूरदर्शी सोच के तहत लिए गए ये निर्णय दूरगामी परिणाम लाएंगे। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार पशुपालन को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हम चाहते हैं कि झारखंड की प्राकृतिक पहचान बनी रहे और यहाँ के हर किसान के चेहरे पर मुस्कान आए।”

इस कार्यक्रम में मुख्य सचिव, कृषि सचिव अबू बकर सिद्दीकी, IIHR और ICAR के वरिष्ठ वैज्ञानिक और विभिन्न विभागों के निदेशक उपस्थित थे। झारखंड के कृषि इतिहास में 12 मार्च का यह दिन एक मील का पत्थर साबित होगा, जो राज्य को कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाएगा।

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