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सीयूजे बना जीएसटी सुधारों पर राष्ट्रीय संवाद का मंच

Ranchi: केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (सीयूजे) के अर्थशास्त्र एवं विकास अध्ययन विभाग में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी रिफॉर्म्स एंड इंडिया’s ग्रोथ पोटेंशियल: सेक्टोरल इम्प्लीकेशंस एंड पॉलिसी पर्सपेक्टिव्स” का दूसरा दिन विचार-विमर्श, शोध पत्र प्रस्तुतियों, सांख्यिकीय प्रशिक्षण सत्रों और समापन समारोह के साथ संपन्न हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत विभागाध्यक्ष और संयोजक डॉ. संहिता सुचरिता के स्वागत भाषण से हुई। मुख्य सत्र का उद्घाटन डॉ. संतोष मेहरोत्रा ने किया। उन्होंने कहा कि जीएसटी ने भारत की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को सरल बनाया है, हालांकि शुरुआती दौर में डिजिटल पहुंच और MSMI भुगतान से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आईं।

कार्यक्रम में मौजूद कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रो. पंचानन दास ने जीएसटी के तहत कर उछाल और राज्यों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि करों में कमी आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करती है। वहीं एक्सएलआरआई, जमशेदपुर के डॉ. देवी प्रसाद बल ने कहा कि GST सुधारों से उपभोक्ता कल्याण बढ़ा है और झारखंड, ओडिशा व बिहार जैसे राज्यों के राजकोषीय प्रदर्शन में सुधार हुआ।

सम्मेलन के दौरान तकनीकी शोध पत्र प्रस्तुति सत्र आयोजन में कई छात्रों ने भाग लिया जिनकी अध्यक्षता प्रो. जेवीएम शर्मा, प्रो. नारायण सेठी, प्रो. पंचानन दास और डॉ. सुरेश पात्रा ने की। इसके अलावा डॉ. रंजन कुमार मोहंती, श्री विवेक कुमार, डॉ. सेबा मोहंती और श्री मनीष राय द्वारा ई-व्यूज और स्टाटा पर सांख्यिकीय प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए गए।

समापन सत्र में प्रो. जेवीएम शर्मा ने सम्मेलन की संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत की और प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम का समापन डॉ. संहिता सुचरिता के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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