रांची: केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (सीयूजे) के अर्थशास्त्र एवं विकास अध्ययन विभाग द्वारा “अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार और भारत की विकास क्षमता: क्षेत्रवार प्रभाव एवं नीतिगत दृष्टिकोण” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन के पहले दिन राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान, नई दिल्ली (एनआईपीएफपी); राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, राउरकेला; हैदराबाद विश्वविद्यालय; केंद्रीय विश्वविद्यालय राजस्थान तथा भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, रांची सहित विभिन्न राज्यों और संस्थानों से आए शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, संकाय सदस्यों तथा जीएसटी अधिकारियों ने भाग लिया और जीएसटी की बदलती संरचना तथा भारत की आर्थिक प्रगति में उसकी भूमिका पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम की शुरुआत अर्थशास्त्र एवं विकास अध्ययन विभाग की अध्यक्ष डॉ. संहिता सुचरिता के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने भारत की आर्थिक नीति और विकास में जीएसटी सुधारों की महत्ता पर प्रकाश डाला।
विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. जे. वी. एम. शर्मा, अर्थशास्त्र विभाग, हैदराबाद विश्वविद्यालय ने भारत में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के इतिहास, कर अनुपालन से जुड़ी चुनौतियों तथा जीएसटी लागू होने की परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए जीएसटी के नए सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया।
जीएसटी प्रशासन की ओर से श्री सुबोध कुमार, सहायक आयुक्त, जीएसटी, झारखंड ने उत्पादकों और निर्माताओं के बीच जीएसटी के क्रियान्वयन पर अपने विचार रखे। उन्होंने जीएसटी सुधार 2.0 को विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया, साथ ही कर चोरी जैसी चुनौतियों का भी उल्लेख किया। वहीं श्री आत्मचैतन्य चौधरी, सहायक आयुक्त, जीएसटी, झारखंड ने कर प्रणाली के सरलीकरण और तार्किकीकरण के माध्यम से विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने पर जोर दिया। उन्होंने भारत की उत्पादन क्षमता का उल्लेख करते हुए बताया कि देश दूध और जूट उत्पादन में प्रथम तथा चावल और कुल खाद्य उत्पादन में द्वितीय स्थान पर है।
मुख्य अतिथि प्रो. एन. आर. भानुमूर्ति, निदेशक, मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स ने कहा कि जीएसटी ने भारत की कर प्रणाली को सरल और अधिक न्यायसंगत बनाया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर लगभग 7.4 प्रतिशत है, जो विश्व में सबसे अधिक में से एक है। उन्होंने कहा कि जीएसटी सुधारों ने निजी उपभोग, निजी निवेश तथा श्रम प्रधान क्षेत्रों जैसे विनिर्माण और खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा दिया है।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. के. बी. पांडा, अध्यक्ष, सांख्यिकी एवं डेटा साइंस विभाग, सीयूजे ने जीएसटी को आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने वाला महत्वपूर्ण सुधार बताया। उन्होंने कहा कि जीएसटी राजस्व में एक प्रतिशत वृद्धि से लगभग 0.56 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि संभव है।
एक विशेष सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. रंजन कुमार मोहंती, सहायक प्राध्यापक, जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (एक्सआईएम) ने जीएसटी की मूल अवधारणा, इसकी विभिन्न कर श्रेणियों तथा आईजीएसटी, सीजीएसटी और एसजीएसटी जैसे घटकों की जानकारी दी और कहा कि एक प्रभावी जीएसटी व्यवस्था भारत की आर्थिक वृद्धि को गति दे सकती है।
विशिष्ट अतिथि प्रो. नारायण सेठी, अध्यक्ष, अर्थशास्त्र विभाग, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला ने जीएसटी का वित्तीय समावेशन और लोगों के कल्याण पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा करते हुए अपने अनुभवजन्य शोध अध्ययनों के निष्कर्ष प्रस्तुत किए।
सम्मेलन के पहले दिन का समापन डॉ. आशीष कुमार मेहर, सहायक प्राध्यापक, अर्थशास्त्र एवं विकास अध्ययन विभाग, सीयूजे द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।