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वित्त मंत्री को पत्र: आउटसोर्सिंग कर्मियों के मानदेय में देरी पर जताई चिंता, अनावश्यक खर्चों में कटौती की मांग

नई दिल्ली: भारत सरकार के विभिन्न विभागों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत सफाई कर्मियों और सुरक्षा कर्मियों की आर्थिक स्थिति को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है। पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि जहाँ देश ‘चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था’ बनने की ओर अग्रसर है, वहीं जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारी वेतन के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

मुख्य अंश:
पत्र में विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि “भारत सरकार के कई विभागों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से काम किया जा रहा है, लेकिन नवंबर से अधिकांश विभागों में चौथी अर्थव्यवस्था बनने के लिए फंड की कमी है।” इसका सीधा असर उन कर्मियों पर पड़ रहा है जो निर्माण और सुरक्षा कार्यों में लगे हैं। पत्र के अनुसार, “भारत सरकार के निर्माण कार्य में लगे सफाई कर्मियों और सुरक्षा कर्मियों को अपना मानदेय मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।”

सुझाव और मांग:
वित्त मंत्री से अनुरोध किया गया है कि वे विभागों के बजट प्रबंधन में सुधार करें। पत्र में समाधान सुझाते हुए कहा गया है कि “विभागों के अनावश्यक खर्चों को कम करके, अत्यंत सेवा प्रदान करने वाली एजेंसी को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर रात्रि सेवा प्रदान की जानी चाहिए।”

यह मांग उठाई गई है कि आर्थिक विकास के लक्ष्यों के बीच उन श्रमिकों के सामाजिक और वित्तीय हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए, जो सरकारी बुनियादी ढांचे को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वित्त मंत्रालय से अपेक्षा की गई है कि वह जल्द ही इस पर संज्ञान लेकर फंड जारी करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करेगा।

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