खूंटी: सर्व सनातन समाज के तत्वावधान में शुक्रवार को आयोजित ‘विराट हिंदू सम्मेलन’ में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दिग्गज नेताओं ने शिरकत की। सम्मेलन में वक्ताओं ने जनजातीय पहचान, धर्मांतरण और आरक्षण के लाभों पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
“ईसाई बन चुके लोग हड़प रहे हैं 80% आदिवासी आरक्षण” — मिलिंद परांडे
विहिप के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने मुख्य वक्ता के रूप में जनजातीय समाज की वर्तमान स्थिति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग अपनी मूल परंपराओं और पूजा पद्धति को त्याग कर ईसाई बन चुके हैं, वे आज 80 प्रतिशत आदिवासी आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं।
परांडे ने कहा, “संविधान में एसटी (ST) आरक्षण का प्रावधान आदिवासियों की परंपराओं, पूजा पद्धति और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए किया गया था। लेकिन आज असली आदिवासी अपने हक से वंचित हैं।” उन्होंने पूर्व सांसद कार्तिक उरांव के प्रयासों का भी जिक्र किया, जिन्होंने धर्मांतरित लोगों को आरक्षण से बाहर करने के लिए बिल पेश किया था।
अस्तित्व और परंपराओं का संकट
हिंदू समाज को दुनिया का सबसे पुराना समाज बताते हुए परांडे ने जनसंख्या असंतुलन पर भी बात की। उन्होंने कहा झारखंड के लगभग दो हजार गांवों के सरना स्थलों की मिट्टी का उपयोग राम मंदिर निर्माण में होना प्राचीन सांस्कृतिक एकता का प्रमाण है। उन्होंने चेताया कि जहां विश्व में कई इस्लामी और ईसाई देश हैं, वहीं भारत और नेपाल ही हिंदुओं के मुख्य केंद्र हैं, जहाँ समाज को अपनी एकजुटता पर विचार करना होगा। उन्होंने बिरसा मुंडा के बलिदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने जबरन धर्मांतरण के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी, और आज भी गांवों में ऐसी साजिशें जारी हैं।
आरएसएस के 100 वर्ष और एकजुटता का संकल्प
आरएसएस के प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा ने कहा कि हिंदू समाज हजारों वर्षों से आक्रमणों का शिकार रहा है, जिससे समाज में बिखराव आया। उन्होंने बताया कि 1925 में संघ की स्थापना इसी बिखराव को खत्म करने के लिए हुई थी। 2025-26 में संघ के 100 वर्ष पूरे होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “हिंदू ही इस देश के मूल वनवासी हैं। हमें अपनी बहू-बेटियों और परंपराओं की रक्षा का संकल्प लेना होगा। बाहरी आक्रमणकारियों ने जातियों में फूट डालकर देश को गुलाम बनाया, अब हमें एकजुट होकर हर चुनौती का सामना करना है।”
कार्यक्रम की झलकियां
सम्मेलन में वक्ताओं ने समाज से अपील की कि वे जातियों के नाम पर बांटने वाली साजिशों से सतर्क रहें। कार्यक्रम में वनवासी कल्याण केंद्र के मुसाफिर विश्वकर्मा, विहिप जिलाध्यक्ष विनोद जायसवाल, विकास मिश्रा, निखिल कंडुलना, पूनम भेंगरा सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
