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चुनावी शोर से शहर बेहाल: परीक्षार्थी, मरीज और व्यापारी परेशान

संजीत मिश्रा

चतरा: नगर निकाय चुनाव के मद्देनज़र शहर में प्रचार-प्रसार अपने चरम पर है। अध्यक्ष पद समेत विभिन्न वार्डों के प्रत्याशी जोर-शोर से जनसंपर्क में जुटे हैं। लेकिन चुनावी प्रचार के दौरान वाहनों पर लगे लाउडस्पीकरों और डीजे की तेज आवाज अब शहरवासियों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनती जा रही है। लगातार गूंजते भोंगों से ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा है और आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। नगर परिषद अध्यक्ष पद के लिए कुल 22 उम्मीदवार मैदान में हैं। मतदान 23 फरवरी को होना है, ऐसे में चुनाव प्रचार के अंतिम दस दिनों में सभी प्रत्याशियों ने अपनी ताकत झोंक दी है। पंपलेट, बैनर और सोशल मीडिया के साथ-साथ प्रचार वाहनों पर लगे लाउडस्पीकरों के जरिए शहर की गलियों, चौक-चौराहों और मुख्य मार्गों पर लगातार प्रचार किया जा रहा है। एक के पीछे एक चलने वाले इन प्रचार वाहनों से निकलने वाली कर्कश आवाज लोगों के लिए सिरदर्द बन गई है। कई स्थानों पर डीजे जैसे भारी स्पीकरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे शोर का स्तर और बढ़ जाता है।

मरीजों और दुकानदारों को हो रही परेशानी..

चतरा शहर के अधिकांश सरकारी कार्यालय, स्कूल, बैंक और निजी दवाखाने मुख्य सड़कों पर स्थित हैं। इन मार्गों से गुजरते प्रचार वाहनों की तेज आवाज से मरीजों, बुजुर्गों और अस्पतालों में भर्ती लोगों को खासा कष्ट झेलना पड़ रहा है। दुकानदारों (व्यापारियों) का कहना है कि लगातार शोर के कारण ग्राहकों से बातचीत करना मुश्किल हो जाता है, जिससे कारोबार प्रभावित हो रहा है।

इंटर परीक्षा के दौरान बढ़ी चिंता..

एक ओर चुनाव प्रचार तेज है, तो दूसरी ओर इंटरमीडिएट की परीक्षाएं भी चल रही हैं। परीक्षा केंद्रों और स्कूलों के आसपास से गुजरते प्रचार वाहनों की तेज आवाज से परीक्षार्थियों की एकाग्रता भंग हो रही है। अभिभावकों और शिक्षकों ने प्रशासन से अपील की है कि परीक्षा अवधि में स्कूल परिसरों के आसपास ध्वनि नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए, ताकि छात्रों को किसी प्रकार की बाधा न हो।

नियमों के पालन की उठी मांग..

जानकारों का कहना है कि ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियमों के तहत निर्धारित डेसिबल सीमा से अधिक शोर करना दंडनीय है। साथ ही, परीक्षा केंद्रों और अस्पतालों के आसपास ‘साइलेंस जोन’ घोषित क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतना अनिवार्य है। नागरिकों ने जिला प्रशासन और निर्वाचन आयोग से सख्ती बरतने की मांग की है।

प्रत्याशी राजवीर ने दिखाई संवेदनशीलता..

इसी बीच नगर परिषद अध्यक्ष पद के एक प्रत्याशी राजवीर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर परीक्षार्थियों के हितों को ध्यान में रखने की अपील की है। उन्होंने घोषणा की है कि वे अपने प्रचार वाहन केवल शनिवार और रविवार को ही निकालेंगे, ताकि सप्ताह के अन्य दिनों में पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को असुविधा न हो। राजवीर की इस पहल को शहर में सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है। कई अभिभावकों ने इसे सराहनीय निर्णय बताया है।

चुनाव लोकतंत्र का महापर्व है और प्रचार उसका अहम हिस्सा, लेकिन जनहित सर्वोपरि है। ऐसे में जरूरी है कि चुनावी उत्साह और नागरिकों की शांति के बीच संतुलन बनाया जाए। शहरवासियों की मांग है कि प्रशासन समय-सीमा, ध्वनि स्तर और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी सुनिश्चित करे, ताकि चुनावी माहौल में भी आम लोगों को राहत मिल सके।

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