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केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड में ‘खुशी एवं समग्र कल्याण’ पर अंतरराष्ट्रीय मंथन

मानसिक स्वास्थ्य को मानव विकास का केंद्र बताया

Ranchi: कुलपति प्रो. क्षिति भूषण दास के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (CUJ) द्वारा “खुशी एवं समग्र कल्याण” विषय पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन सीयूजे सभागार में किया गया। सम्मेलन का आयोजन विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर हैप्पीनेस एंड होलिस्टिक वेल-बीइंग द्वारा किया गया, जिसका विषय था — “खुशी एवं समग्र कल्याण: शोध से वास्तविक जीवन तक (कल्याण की अंतर-सांस्कृतिक अवधारणाएँ)”।

इस सम्मेलन का उद्देश्य मानव विकास के केंद्र में मानसिक स्वास्थ्य को स्थापित करना तथा यह संदेश देना था कि मानसिक कल्याण केवल व्यक्तिगत मुद्दा नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी और राष्ट्र की प्रगति का आधार है। कार्यक्रम में देश-विदेश से आए प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, आध्यात्मिक विद्वानों, चिकित्सा विशेषज्ञों और वेलनेस प्रैक्टिशनरों ने भाग लिया। वक्ताओं ने खुशी और कल्याण पर आधारित शोध को व्यावहारिक जीवन से जोड़ने पर विशेष जोर दिया, ताकि इसका लाभ व्यक्ति, संस्थान और समाज तीनों स्तरों पर मिल सके।

सम्मेलन के मुख्य वक्ता (कीनोट स्पीकर) के रूप में गेशे दोर्जी दमदुल, निदेशक, तिब्बत हाउस (परम पावन दलाई लामा का सांस्कृतिक केंद्र) ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम को विशेष स्वरूप प्रदान किया। वे नालंदा परंपरा के प्राचीन भारतीय ज्ञान के प्रतिष्ठित विद्वान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त शिक्षक हैं। करुणा, माइंडफुलनेस और नैतिक जीवन मूल्यों के माध्यम से समकालीन मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों को समझाने के लिए वे विश्वभर में जाने जाते हैं। इस अवसर पर कुलपति प्रो. के. बी. दास ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया।

कुलपति प्रो. के बी दास ने कहा कि शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें विद्यार्थियों के मानसिक, भावनात्मक और नैतिक विकास पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विश्वविद्यालय ऐसे मंच बनें, जहाँ शोध, नीति और व्यवहार एक-दूसरे से जुड़कर वास्तविक जीवन की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत कर सकें।

दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग की प्रोफेसर प्रो. संगीता ढाल ने अतिथि वक्ता के रूप में सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने सतत विकास लक्ष्य–3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण) के संदर्भ में नीति आधारित दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए सतत एवं समावेशी विकास में मानसिक स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

सम्मेलन के प्लेनरी सत्रों में अध्यात्म, मनोविज्ञान, चिकित्सा, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक परिवर्तन के क्षेत्र से जुड़े कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञ शामिल हुए।
डॉ. बी. बी. लाल ने सहज योग के माध्यम से आत्म-साक्षात्कार, आंतरिक संतुलन और समग्र स्वास्थ्य पर आधारित अपने 25 वर्षों से अधिक के अनुभव साझा किए।

गेशे तेनजिन दामचोए, सोशल, एथिकल एंड इमोशनल लर्निंग (SEE Learning) और माइंडफुलनेस के प्रशिक्षक, ने नैतिकता, भावनात्मक समझ और सजगता के विकास पर अपने विचार रखे।

श्री अनुपम रोहित, रिकवरी वेलनेस सेंटर, नॉर्थ ईस्ट इंडिया के संस्थापक एवं प्रमुख, ने युवाओं के पुनर्वास और नशा मुक्ति के क्षेत्र में किए जा रहे सामुदायिक प्रयासों पर प्रकाश डाला।

डॉ. रविकांत चतुर्वेदी, न्यूक्लियर मेडिसिन विशेषज्ञ, ने शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण के आपसी संबंध को रेखांकित किया।
वहीं प्रो. अरविंद कुमार, रांची इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री एंड एलाइड साइंसेज़ (RINPAS) से, ने मनोसामाजिक हस्तक्षेप, मानसिक स्वास्थ्य नीति और समुदाय आधारित सेवाओं पर केंद्रित अपने अनुभव साझा किए।

इन सभी वक्ताओं ने मिलकर खुशी और समग्र कल्याण की एक समन्वित, बहुआयामी और व्यावहारिक दृष्टि प्रस्तुत की, जिससे सम्मेलन में शैक्षणिक विमर्श के साथ-साथ वास्तविक जीवन से जुड़ी समझ भी समृद्ध हुई।

यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन और समग्र शिक्षा के क्षेत्र में केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड की सक्रिय एवं नेतृत्वकारी भूमिका को दर्शाता है तथा भावनात्मक रूप से सशक्त, सजग और सामाजिक रूप से जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को मजबूती से रेखांकित करता है।

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