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कोडरमा सदर अस्पताल की बदहाली: 2017 से बिना लाइसेंस चल रहा ब्लड बैंक, दवाओं की कमी से मरीज बेहाल

कोडरमा: जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल की व्यवस्थाएं एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। 22 जनवरी 2026 को News7Air की टीम ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, जहाँ कर्मचारियों के साथ हुए सीधे संवाद में कई चौंकाने वाली खामियां उजागर हुईं। ड्रग इंस्पेक्टर की कार्रवाई के बाद अस्पताल के ब्लड बैंक पर ताला लटक गया है, जिससे मरीजों की जान जोखिम में है।

संवाददाता संतोष कुमार की पड़ताल में यह बात सामने आई कि कोडरमा सदर अस्पताल का ब्लड बैंक पिछले 9 वर्षों (2017) से बिना लाइसेंस नवीनीकरण के संचालित हो रहा था। ड्रग इंस्पेक्टर राजीव एक्का ने नियमों की अनदेखी और तकनीकी खामियों के कारण फिलहाल ब्लड बैंक के संचालन पर रोक लगा दी है।

कर्मचारियों ने बताया कि अस्पताल में न केवल लाइसेंस की समस्या है, बल्कि रक्त की उपलब्धता भी एक बड़ा मुद्दा है। अस्पताल में B+ और O+ जैसे ग्रुप तो मिल जाते हैं, लेकिन रेयर ब्लड ग्रुप (जैसे- O नेगेटिव) न होने के कारण गरीब मरीजों को निजी अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

इसके अलावा, अस्पताल में दवाओं का भारी टोटा है। मरीजों के परिजनों को अधिकांश दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं, जो सरकारी स्वास्थ्य दावों की पोल खोलता है। वहीं, अपनी ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों ने भी अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि समय पर वेतन (Payment) न मिलने या होल्ड होने के कारण वे आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। राहत की एकमात्र खबर यह रही कि हाल ही में शुरू हुए अल्ट्रासाउंड केंद्र से मरीजों को थोड़ी सहूलियत मिली है, जो लंबे समय से लंबित था।

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