स्वयंसेवी संगठनों के माध्यम से छ्द्म समाजसेवियों द्वारा आदिवासी जमीन की लूट बंद हो : बंधु तिर्की
समाजसेवा का नाटक कर झारखण्ड में गाँव-देहात तक में जारी है आदिवासियों की जमीन लूट, मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग.
रांची 20 दिसम्बर. पूर्व मंत्री, झारखण्ड सरकार की समन्वय समिति के सदस्य एवं झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने कहा है कि स्वयंसेवी संगठनों को आधार बनाकर तथाकथित समाजसेवियों के द्वारा झारखण्ड में आदिवासियों की जमीन लूटी जा रही है. उन्होंने कहा कि शुरुआत में कुछेक महीने या वर्ष तक ऐसे संगठन समाजसेवा का वैसा ढ़ोंग रचते हैं जो समाजसेवा की बजाय दिखावा कहीं ज्यादा है और बाद में उन्हीं जमीनों को लूट लिया जाता है. बाद में उसी जमीन का पूरी तरीके से व्यावसायिक उपयोग किया जाता है.
श्री तिर्की ने कहा कि वैसे संगठनों में दिखावे के लिए अनुसूचित जनजाति के कुछ लोगों को कुछ दिखावटी पद दे दिये जाते हैं लेकिन एनजीओ का संचालन मुख्य रूप से अन्य जातियों, विशेषकर दूसरे राज्यों से आये वैसे लोगों के द्वारा किया जाता है जिनका ना तो झारखण्ड से कोई भावनात्मक लगाव है और ना ही यहाँ के लोगों के विकास के प्रति ही उनकी कोई इच्छा-संवेदना है.
उन्होंने कहा कि ऐसे एनजीओ द्वारा आदिवासी जमीन को लूटने की यह कार्रवाई न केवल रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो, हजारीबाग जैसे शहरों में की जा रही है बल्कि गाँव-देहात तक में ऐसे लोग पहुँचकर आदिवासियों, अनुसूचित जातियों एवं अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय के लोगों को अपने जाल में फंसा कर अपना उल्लू सीधा करते हैं.
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि अधिकांश एनजीओ के द्वारा यह खेल लंबे समय से जारी है. श्री तिर्की ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील की है कि एनजीओ द्वारा जमीन लूट के लिये जारी ऐसी कार्रवाइयों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए अविलम्ब रोक लगायी जाये.
श्री तिर्की ने कहा कि एनजीओ के द्वारा की जा रही ऐसी कार्रवाइयों के प्रति तीव्र प्रतिरोध की जरूरत है और न केवल सरकार के स्तर पर बल्कि आम लोगों द्वारा भी वैसे लोगों एवं तत्वों का तीव्र प्रतिरोध किया जाना चाहिये