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सूचना देने वाला विभाग ही नहीं देता आरटीआई के आवेदनों का जवाब

सूचना आयोग डिफंक्ट होने के कारण बढ़ गया है सरकारी बाबुओं का मन

Ranchi: झारखंड के सरकारी विभाग सूचना आयोग के डिफंक्ट होने का खूब फायदा उठा रहे हैं। हजारों आवेदन सरकारी दफ्तरों में धूल फांक रहे हैं। दूसरे विभाग तो छोड़िये सूचना देने वाला सूचना एवं जनसंपर्क विभाग भी सूचना अधिकार अधिनियम के तहत पूछे गये सवालों के जवाब आवेदकों को नहीं दे रहे हैं। सोशल एक्टिविस्ट सर्वेश कुमार सिंह ने 26 अक्टूबर 2023 को सूचना एवं जनसंपर्क विभाग से आरटीआई के तहत झारखंड अखबारों, न्यूज चैनलों और अन्य मीडिया को 6 महीने में विज्ञापन मद में दी गई राशि की जनकारी मांगी थी। यू ट्यूब चैनलों को विज्ञापन देने की शर्तें क्या है यह पूछा था। पीआरडी से रजिस्टर्ड सभी न्यूजपेपर, न्यूज चैनलस मैगजीन और यू-ट्यूब चैनलों का रजिस्ट्रेशन वर्ष सहित मांगा था। यह सामान्य सूचनाएं भी आईपीआरडी ने एक महीने के अंदर उपलब्ध नहीं कराया। इसके बाद सर्वेश 14 दिसंबर 2023 को प्रथम अपील में गये। तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन अबतक उन्हें सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई है।

विधानसभा को नेता प्रतिपक्ष मिलने के बाद भी नहीं हो रही नियुक्ति

दरअसल राज्य में मई 2020 से मुख्य सूचना आयुक्त और 6 सूचना आयुक्तों का पद खाली है। इसके कारण सरकारी दफ्तरों के बाबुओं में सूचना आयोग का डर खत्म हो चुका है। हर दफ्तर में सर्वेश सिंह जैसे हजारों आवेदकों के कई आवेदन धूल फांक रहे हैं। मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त पद के लिए सरकार को 450 से अधिक आवेदन मिल चुके हैं, लेकिन अबतक नियुक्ति नहीं हुई है। हेमंत सरकार के समय यह कहा जा रहा था कि सूचना आयुक्त की नियुक्ति में नेता प्रतिपक्ष की अहम भूमिका होती है। सदन में नेता प्रतिपक्ष नहीं होने के कारण नियुक्ति नहीं हो रही। अक्टूबर 2023 में ही भाजपा विधायक दल के नेता अमर बाउरी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का दर्जा मिल चुका है, लेकिन 6 महीने बाद भी सूचना आयुक्तों की नियुक्ति का रास्ता साफ नहीं हो पाया है।

सूचना आयोग में भी लगा फाइलों का अंबार

उधर सूचना आयोग में भी 4 सालों में फाइलों का अंबार लग गया है। आयोग के दफ्तर में राज्यभर से आये हजारों अपील फाइलों में धूल फांक रहे हैं। हर महीने 140 से ज्यादा अपील ऑनलाइन और ऑफलाइन आयोग को मिल रहे हैं। सूचना आयोग में पेंडिंग अपीलों की संख्या 15050 से ज्यादा पहुंच चुकी है। इनमें 7657 अपील वैसे हैं जिनमें मई 2020 से पहले एक या दो बार सुनवाई हो चुकी है। वहीं आयोग में 230 शिकायतवाद भी पेंडिंग हैं।

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