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शिक्षा व्यवस्था पर संकट: रांची विश्वविद्यालय की बदहाली के खिलाफ एनएसयूआई का निर्णायक संघर्ष

रांची: कांग्रेस भवन में आज एनएसयूआई द्वारा रांची विश्वविद्यालय में व्याप्त शैक्षणिक एवं प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर एक पत्रकार वार्ता आयोजित की गई। इस अवसर पर एनएसयूआई झारखंड प्रदेश अध्यक्ष श्री बिनय उरांव, एनएसयूआई रांची विश्वविद्यालय अध्यक्ष श्री क़ैफ़ अली, उपाध्यक्ष श्री विश्वजीत सिंह तथा एनएसयूआई डोरंडा महाविद्यालय अध्यक्ष इल्यास अंसारी उपस्थित रहे।

पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने विश्वविद्यालय में शैक्षणिक कैलेंडर के अभाव, सत्र में एक से दो वर्षों की देरी, समय पर परीक्षा एवं परिणाम घोषित न होना, छात्रसंघ चुनावों का आयोजन नहीं होना, शिक्षकों की भारी कमी, प्रशासनिक पदों पर अस्थिरता तथा नामांकन, शोध (पीएचडी) एवं छात्रवृत्ति प्रक्रियाओं में हो रही देरी जैसी गंभीर समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि यह स्थिति छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय है और इसे शीघ्र सुधारना अत्यंत आवश्यक है।

प्रदेश अध्यक्ष ने जानकारी दी कि एनएसयूआई द्वारा दिनांक 8 अप्रैल को महामहिम राज्यपाल एवं रांची विश्वविद्यालय प्रशासन को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसमें इन सभी समस्याओं के समाधान हेतु ठोस एवं समयबद्ध कार्यवाही की मांग की जाएगी। प्रशासन को चार दिनों की मोहलत दी जाएगी कि छात्रहित में आवश्यक निर्णय लिए जाएँ।

इस अवसर पर रांची विश्वविद्यालय अध्यक्ष क़ैफ़ अली ने सभी छात्रों एवं छात्र संगठनों से अपील करते हुए कहा कि “हक की लड़ाई में निमंत्रण नहीं भेजे जाते, जिसका ज़मीर ज़िंदा होता है वह स्वयं आगे आता है।” उन्होंने इस मुद्दे को राजनीतिक रूप न देने की अपील करते हुए कहा कि छात्रहित सर्वोपरि है तथा सभी छात्र संगठनों को एकजुट होकर झारखंड में शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन लाने के लिए आगे आना चाहिए।

वहीं उपाध्यक्ष श्री विश्वजीत सिंह एवं डोरंडा महाविद्यालय अध्यक्ष इल्यास अंसारी ने अपने संयुक्त वक्तव्य में कहा कि यदि निर्धारित समयावधि में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कोई ठोस पहल नहीं की जाती है, तो एनएसयूआई व्यापक स्तर पर आंदोलन प्रारंभ करने के लिए बाध्य होगी। एनएसयूआई ने अपने समापन वक्तव्य में स्पष्ट किया कि यह संघर्ष किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकारों की रक्षा एवं शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए है, और जब तक छात्रों को उनका अधिकार एवं एक सुदृढ़ शैक्षणिक वातावरण प्राप्त नहीं होता, तब तक यह आंदोलन निरंतर जारी रहेगा।

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