वामदलों ने सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में दल विशेष के व्यक्तियों की जगह आरटीआई विशेषज्ञों की नियुक्ति की मांग की
रांची: सीपीएम और सीपीआई ने काफी देर से ही सही राज्य सरकार द्वारा कई वषों से सूचना आयोग में रिक्त पड़े पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू किए जाने की घोषणा का स्वागत करता है. लेकिन संवाद माध्यमों से मिली जानकारी के अनुसार जो नाम राज्य सरकार ने चयन कर लोकभवन को स्वीकृति के लिए भेजा है उनमें अधिकांश नाम राजनीतिक पार्टियों से सीधे जूड़े लोगों के हैं. राज्य सरकार का यह कदम उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन करता है.
झारखंड जैसे राज्य में जहां केंद्र सरकार के संरक्षण में बड़े पैमाने पर कोल ब्लाकों के नीलामी के बाद कार्पोरेट घरानों द्वारा खनन के लिए जमीन अधिग्रहण की जा रही है. जिसके चलते विस्थापन की प्रक्रिया तेज हो रही है. सूचना आयोग के निष्क्रिय रहने के कारण जमीन अधिग्रहण से संबधी सूचनाएं रैयतों, जनसंगठनों और राजनीतिक दलों को मिलने में देर होने के कारण कंपनियों द्वारा रैयतों के अधिकारों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से जमीन की लूट की जाती है.
वामदल राज्य सरकार से मांग करता हैं की सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 15 में उल्लेखित पात्रता के आधार पर ही सूचना आयुक्तों का चयन किया जाय और राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को सूचना आयोग के सदस्य के रूप में नामित किए जाने की अनुशंसा वापस ली जाए.